शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का विवादों से रहा है नाता

AYUSH ANTIMA
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वैसे तो अविमुक्तेश्वरानंद ने जब से स्वयं को शंकराचार्य घोषित किया है, इनका विवादों से नाता रहा है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य रहे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने अपना उत्तराधिकारी किसी को भी नहीं बनाया था लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के निधन के तुरंत बाद खुद को शंकराचार्य घोषित कर दिया, जबकि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ था। शंकराचार्य की गद्दी पर कब्जा करने के बाद ज्योतिर्मठ में जो वित्तीय अनियमितताएं हुई, उसका मामला भी अदालत में चला गया। दिवंगत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के परम शिष्य के अनुसार शंकराचार्य घोषित करने की एक धार्मिक परम्परा होती है, जिसकी अनुपालना किए बिना ही अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को स्वयंभू शंकराचार्य घोषित कर दिया। सन् 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने नये शंकराचार्य के रूप में अविमुक्तेश्वरानंद की ताजपोशी पर रोक लगा दी क्योंकि उनकी नियुक्ति में कथित तौर पर अनियमितताएं थी और स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लघंन भी हुआ। यह मामला अभी भी माननीय कोर्ट में विचाराधीन है व लंबित है, तत्पश्चात् एक बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि 10 साल में गौ हत्या पर बैन नहीं लगा, इसलिए सच्चा हिन्दू प्रधानमंत्री कभी नहीं रहा। उन्होंने गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग के साथ ही मोदी सरकार को सनातन विरोधी सरकार करार दिया। हालांकि गौवंश को लेकर उनकी मांग को अनुचित नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि मोदी सरकार ने गौवंश के नाम पर बहुत राजनीति की लेकिन जब गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की बात आई तो बैक फुट पर चली गई लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद की इस मांग ने भी राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया। वर्तमान में ऐसा ही एक ओर विवाद उनके नाम के साथ जुड़ गया। माघ मास में मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में गंगा नदी में करोड़ों सनातनी श्रद्धालु स्नान करने को लेकर एकत्रित हुए थे। अविमुक्तेश्वरानंद अपने सैकड़ों अनुयायियों के साथ शाही सवारी में स्नान करने पहुंचे और संगम तट पर स्नान करने की जिद करने लगे। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें कहा कि शाही रथ के बजाय पैदल चलकर संगम स्नान करें क्योंकि भीड़ होने के कारण शाही रथ से अव्यवस्था होने के साथ ही भगदड़ की आशंका हो सकती है लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद शाही रथ से उतरने को तैयार ही नहीं हुए। रथ को रोके जाने को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद नाराज होकर बिना स्नान किए ही चले गये। तत्पश्चात् उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस में योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनको स्नान से रोकना योगी सरकार के इशारे पर हुआ है क्योंकि योगी ऐसा करके मुझे अपमानित कर रहे हैं। विवादों का व अविमुक्तेश्वरानंद का चोली दामन का साथ रहा है क्योंकि सुर्खियों में रहने के लिए विवादित व राजनीतिक बयानबाजी करते रहते हैं।

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