राजस्थान में जब से भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार का गठन हुआ है, सरकार पर अफसरशाही के हावी होने की खबरें सुर्खियों में रही है। अभी हाल ही में जयपुर में भाजपा की संगठनात्मक बैठक में प्रदेश भर से जिलाध्यक्ष व संगठन के पदाधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक कार्यकर्ताओं में संगठन को लेकर बूथ लेवल तक मजबूत करना व सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने को लेकर थी लेकिन इस बैठक में प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस बात से हटकर कहा कि यदि अफसर हमारे कार्यकर्ताओ के फोन रिसीव नहीं करेंगे तो परिणाम भुगतने को तैयार रहें। इससे पहले भी वो अपने संसदीय क्षेत्र में अफसरशाही को लेकर मुखर बयान दे चुकी है। उनका यह बयान यह साबित करता है कि राजस्थान में अफसरशाही हावी है। यह बैठक संगठनात्मक ढांचे को सुदृढू बनाने को लेकर थी लेकिन वसुंधरा राजे ने भजन लाल शर्मा सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा है। यह बयान निश्चित रूप से सरकार की कार्यशैली पर प्रहार है, जिसको लेकर उन्होंने अपनी नाखुशी जताई है। वैसे देखा जाए तो राजस्थान में अफसरशाही हावी होने को लेकर कोई संशय नहीं है। प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव सुपर सीएम की तरह काम कर रहे थे। कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि विधायक भी यह कहते नजर आते थे कि अफसर उनकी नहीं सुनते हैं। वसुंधरा राजे के इस बयान पर मोहर लगा दी केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के उस पत्र ने, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में शेखावत ने जोधपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए थे। इससे स्पष्ट होता है कि जब अफसर केन्द्रीय मंत्री की ही नहीं सुनते तो कार्यकर्ता और विधायक किस खेत की मूली हैं।
बैठक में वसुंधरा राजे ने अफसरों को नसीहत देकर भजन लाल शर्मा सरकार को भले ही खड़ा किया हो, अपितु भजन लाल शर्मा ने कार्यकर्ताओं में जोश का संचार करते हुए कहा कि उनको सरकार के विकास कार्यों को सीना ठोककर जनता को बताने चाहिए। कार्यकर्ताओं को बचाव की मुद्रा में नहीं रहना होगा क्योंकि सरकार ने अपने दो साल के कार्यकाल में कोई ग़लत काम नहीं किया है। कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाकर कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने का काम करना चाहिये। इस बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने कहा कि भाजपा किसी एक व्यक्ति या परिवार की पार्टी नहीं है। पार्टी में नये लोगों को पद देने से नयापन आता है। पुराने अनुभव के साथ नये जोश की जरूरत है, उनका इशारा राजे की तरफ था। संतोष के इस बयान को झुन्झुनू जिले के महत्वाकांक्षी नेताओं को भी समझना होगा, जो जिलाध्यक्ष द्वारा घोषित कार्यकारिणी को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं कि उनको पद क्यों नहीं मिला क्योंकि हम वरिष्ठता की श्रेणी में आते हैं और संगठन में पदों पर हमारा ही एकाधिकार होना चाहिए लेकिन संतोष के अनुसार बदलाव जरूरी है और नये चेहरों को आगे लाना ही होगा।