झुन्झुनू भाजपा और गुटबाजी का चोली दामन का साथ रहा है। इसका मूल कारण है आयातित नेताओं का भाजपा में जमावड़ा और उनकी निजी महत्वकांक्षायें है। विदित हो झुन्झुनू जिलाध्यक्ष की घोषणा के साथ ही भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने उनके मनोनयन पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए थे तत्पश्चात भाजपा ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया था। यदि अतीत में झांकें तो पवन मावंडिया ने अपने जिलाध्यक्ष के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए और उसी टीम को भी दो कार्यकाल का मौका मिला तत्पश्चात बनवारी लाल सैनी को जिलाध्यक्ष बनाया गया लेकिन उन्होंने भी अपना कार्यकाल उसी टीम के साथ पूरा किया और बिना कार्यकारिणी के गठन बिना ही उनको जिलाध्यक्ष के पद से मुक्त कर दिया गया। झुंझुनूं में मची गुटबाजी को लेकर आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने अपने लेखों में प्रदेश नेतृत्व को आगाह किया था लेकिन जिले में प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत के ताबड़तोड़ दौरे भी इस गुटबाजी पर लगाम नहीं लगा पाए। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष की नियुक्ति पर भी समाचार पत्र ने सवाल खड़े किए थे और आगाह किया था कि नई कार्यकारिणी इस गुटबाजी की आग में घी का काम करेगी। यदि झुन्झुनू जिले के नेताओं की बात करें तो पूर्व जिलाध्यक्ष पवन मावंडिया अपनी पुरानी कार्यशैली में बदलाव कर ओबीसी के चेहरे के रूप में उभरे हैं। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से उनकी नजदिकियों का ही परिणाम है कि उनको राजस्थान ओबीसी आयोग का सदस्य बनाया गया। भाजपा द्वारा घोषित कार्यकारिणी में पवन मावंडिया का वर्चस्व स्पष्ट दिखाई देता है। दबी जबान से यह भी सुनने को मिल रहा है कि पुराने व अनुभवी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया लेकिन शायद उनको भान होना चाहिए कि यह मोदी शाह की भाजपा है, उसी का परिणाम है कि एक बार के विधायक भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी गई। झुन्झुनू के पुराने कार्यकर्ताओं को इस बात से प्रेरणा लेनी चाहिए कि भजन लाल शर्मा से ज्यादा अनुभवी व कद्दावर नेता पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को दरकिनार कर उनको सूबे की कमान सौंपी तो जिलाध्यक्ष कार्यकारिणी पर करीब एक दशक से कुंडली जमाए बैठे थे, क्या युवा पीढ़ी को कमान नहीं देनी चाहिए। क्या कार्यकारिणी पर केवल और केवल उन्हीं चेहरों को स्थान मिलना चाहिए या आयातित नेताओं को स्थान मिलना चाहिए। सार्वजनिक रूप से जो नेता सोशल मीडिया पर बयान दे रहे हैं, क्या उन पर भी वही कार्यवाही होगी, जो प्रदेश प्रवक्ता पर हुई है। संगठन में कोई भी नियुक्ति भाजपा प्रदेश नेतृत्व का विशेषाधिकार है लेकिन यदि समय रहते प्रदेश भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने इन छपास के रोगी नेताओं से किनारा नहीं किया तो भाजपा के लिए नुकसानदायक होंगे।
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