कॉलेजों की गलती की सजा छात्रों को क्यों, संस्कृत विश्व विद्यालय का निर्णय अन्यायपूर्ण: संयुक्त अभिभावक संघ

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा तय सीटों से अधिक प्रवेश देने वाले 11 निजी कॉलेजों पर जुर्माना न भरने की स्थिति में विद्यार्थियों को परीक्षा से बाहर करने का निर्णय न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। संयुक्त अभिभावक संघ ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
संघ ने कहा कि जिन कॉलेजों ने नियमों की अनदेखी कर अधिक प्रवेश दिए, उनकी गलती की सजा निर्दोष विद्यार्थियों को क्यों दी जा रही है। छात्रों ने न तो सीटें बढ़ाईं, न ही नियम तोड़े, फिर उनका शैक्षणिक भविष्य दांव पर क्यों लगाया जा रहा है। संयुक्त अभिभावक संघ राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कॉलेजों की मनमानी और प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतने पर मजबूर किया जा रहा है। यह निर्णय शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य को बर्बाद करने वाला कदम है। विश्वविद्यालय का मकसद भविष्य बनाना होना चाहिए, न कि छात्रों को दंडित करना। उन्होंने आगे कहा कि यदि कॉलेजों ने नियमों का उल्लंघन किया है तो कार्रवाई सीधे कॉलेज प्रबंधन पर होनी चाहिए, न कि विद्यार्थियों पर। परीक्षा से वंचित करना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। संघ ने तीन प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि

* कॉलेजों की गलती की सजा विद्यार्थियों को देना तुरंत बंद किया जाए।

* राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय सभी संबद्ध निजी कॉलेजों को अपने सख्त आधीन लेकर पारदर्शी और नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था लागू करे।

* सभी प्रभावित विद्यार्थियों को बिना शर्त परीक्षा में शामिल किया जाए, ताकि उनका शैक्षणिक वर्ष और भविष्य सुरक्षित रह सके। अभिषेक जैन बिट्टू ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो संयुक्त अभिभावक संघ अभिभावकों और छात्रों के साथ मिलकर आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा। संघ ने राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग से भी हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सुरक्षित, सशक्त और भविष्य के लिए तैयार करना होना चाहिए।

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