बीकानेर। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की अव्यवस्था ने छात्रों और अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है। बीकानेर विश्वविद्यालय से ऐसा ही मामला सामने आया है। जंहा प्रथम वर्ष के छात्रों की फीस का भुगतान से संबंधित मामला है। जिसमें बताया जाता है कि एक छात्र अर्जुन पंचारिया द्वारा समय पर कर दिया गया, लेकिन तकनीकी खामी के चलते तीन दिन बाद भी पोर्टल पर “पेमेंट पेंडिंग” की स्थिति ही दिखाई दे रही है।
परिजनों ने जब तकनीकी टीम से संपर्क किया तो प्रारंभ में 24 से 28 घंटे में समाधान का भरोसा दिलाया गया, लेकिन तय समय बीतने के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही। स्थिति तब और चौंकाने वाली हो गई, जब तीन दिन बाद दोबारा सहायता मांगने पर तकनीकी टीम ने अर्जुन पंचारिया सिंधु को ही ब्लॉक कर दिया।
विश्वविद्यालय की आधिकारिक हेल्पलाइन का समय सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा सुबह 9:40 बजे तक भी तकनीकी टीम का फोन स्विच ऑफ पाया गया। इससे छात्रों और अभिभावकों के प्रति गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता साफ झलकती है।
उधर, बीकानेर की एम.एस. कॉलेज में एक और चिंताजनक मामला सामने आया है। कॉलेज द्वारा केवल एक प्रैक्टिकल विषय के लिए 4,000 रुपये शुल्क लिया जा रहा है, जिसकी कोई स्पष्ट आधारशिला तक नहीं बताई जाती। छात्र और अभिभावक जब इस बारे में संबंधित प्रोफेसरों से जानकारी मांगते हैं, तो उचित जवाब भी नहीं दिया जाता।
चिंता की बात यह है कि इस कॉलेज में करीब 95 प्रतिशत छात्राएं ग्रामीण क्षेत्रों से आती हैं, जिनके पिता मजदूरी या छोटी खेती पर निर्भर हैं, और जिनकी मासिक आय लगभग 5,000 से 6,000 रुपये ही होती है। ऐसे में सिर्फ एक प्रैक्टिकल विषय की फीस ही परीक्षा शुल्क से चार गुना होना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर भारी बोझ बन रहा है।
छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी सवाल खड़े करती है। शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में इस प्रकार की लापरवाही न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित करती है, बल्कि संस्थानों पर भरोसा भी कमजोर करती है।
[11/12, 9:33 pm] Narayan G-Bikaner: 👍🏼👍🏼👍🏼👍🏼👍🏼👍🏼👍🏼👍🏼👍🏼👍🏼