जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): वीटी रोड मेला ग्राउंड मानसरोवर में आचार्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज की 7 दिवसीय श्रीमद्भगवद् कथा आयोजित की गई। कथा जो विश्व की ऐसी प्रथम भागवत कथा है, जिसमें ‘नो तिलक नो एन्ट्री’’ के स्लोगन के साथ केवल तिलक लगाकर ही श्रद्धालुओं को कथा में प्रवेश दिया जा रहा है। ‘‘भारत वर्ल्ड बुक आफ रिकार्ड’’ के सीएमओ सर्वश्रेष्ठ माथुर, ज्युरी मेम्बर केडी सिंघल एवं एडिटर फाउण्डर मनोज पाण्डेय ने महाराज देवकीनंदन जी ठाकुर को व्यासपीठ पर ही सर्टिफिकेट प्रदान किया। कथा संयोजक अखिलेश अत्री का भी टीम द्वारा सम्मान किया गया। सीएमओ सर्वश्रेष्ठ माथुर ने बताया कि ‘‘नो तिलक-नो एन्ट्री’’ स्लोगन के साथ यह कथा विश्व की प्रथम ऐसी कथा है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं को तिलक के साथ ही पाण्डाल में प्रवेश दिया गया। बिना तिलक के प्रवेश वर्जित रहा, जिसकी देश के साथ-साथ पूरे विश्व में चर्चा हो रही है।
श्रीमद्भागवत कथा का समापन
धर्म युक्त संतान सिर्फ मनुष्य के पास होती है। पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर पूज्य महाराजश्री ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हिंदू जागे, एकत्रित हो और अपनी एकता को सुदृढ़ बनाए। भारत के सनातनियों को अपनी आवाज बुलंद करनी होगी और धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित होना होगा। महाराज श्री ने विशेष रूप से माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को धर्म के विषय में अवश्य बताएं। उन्हें सनातन संस्कृति का बोध कराएं, धर्म का ज्ञान दें ताकि आने वाले समय में वे अपने धर्म, मूल्यों और पहचान को समझ सकें और उस पर गर्व कर सकें। मुख्य व्यवस्थापक अखिलेश अत्री व सह व्यवस्थापक मनोज पांडे ने बताया कि महाराज श्री ने युवा पीढ़ी को विशेष संदेश देते हुए कहा कि आज की जीवनशैली युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना रही है। एक शोध का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जो बच्चे और युवा रात्रि में देर से सोते हैं, विशेषकर जो 12 बजे के बाद सोते हैं, उनकी नींद धीरे-धीरे कम हो जाती है। इससे उनकी शक्ति घटती है और शरीर में अनेक प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न होने लगती हैं। संयमित दिनचर्या और समय पर विश्राम अत्यंत आवश्यक है। प्रमुख समाजसेवी चंद्र प्रकाश भाड़े वाला ने बताया कि महाराज श्री ने कहा कि कि आज हमारी सनातन संस्कृति का मज़ाक उड़ाया जा रहा है, जबकि यदि कहीं जीवन जीने की सही कला सिखाई गई है, तो वह केवल सनातन धर्म में ही सिखाई गई है। यदि मनुष्य सनातन धर्म के सिद्धांतों और मर्यादाओं के अनुसार जीवन जीए, तो उसका जीवन निश्चय ही सफल और सार्थक हो सकता है। उन्होंने तिलक और सनातन प्रतीकों पर उठने वाले विवादों पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि तिलक पर किसी को आपत्ति होती है, तो होने दें, क्योंकि तिलक हमारी सनातन संस्कृति की पहचान है। यही हमारी जड़ें हैं, यही हमारी अस्मिता है और इन्हें लेकर हमें किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए। आगामी अंग्रेज़ी कैलेंडर के नए वर्ष को लेकर महाराज श्री ने निवेदन किया कि यदि नए साल की शुरुआत करनी है तो भगवान के भजन और नाम-स्मरण से करें, न कि शराब, शोर-शराबे और डिस्को संस्कृति से। उन्होंने 25 दिसंबर के संदर्भ में कहा कि यदि किसी का क्रिसमस मनाने का भाव नहीं है, तो उस दिन तुलसी और शालिग्राम जी की पूजा कर अपने सनातन से जुड़ें।
महाराज श्री ने यह भी उल्लेख किया कि उड़ीसा के एक संत द्वारा भविष्य मालिका के माध्यम से यह भविष्यवाणी की गई है कि 2025 से 2028 तक भारत के लिए एक विकराल समय आ सकता है। उन्होंने कहा कि इसकी सत्यता पर कोई निश्चित दावा नहीं किया जा सकता लेकिन यह विश्वास अवश्य व्यक्त किया गया है कि उस समय वही सुरक्षित रहेंगे, जो नाम-जप, भक्ति और ईश्वर से जुड़े रहेंगे।
आज एक गंभीर विषय पर सभी सनातनियों को चिंतन करने की आवश्यकता है। सनातनियों का परिवार धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है, जबकि हमारा धर्म, संस्कृति और परंपराएँ सदैव संयुक्त, बड़े और संस्कारवान परिवारों की पक्षधर रही हैं। जब परिवार बड़ा होता है, तो बच्चों में आपसी प्रेम, जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों का विकास होता है। एक खुशहाल और सशक्त समाज की नींव संस्कारयुक्त संतानों से ही रखी जाती है। इसलिए सनातनी समाज को आत्ममंथन करते हुए यह समझना होगा कि कम से कम 4 संतानें होना केवल परिवार की वृद्धि नहीं, बल्कि संस्कृति की रक्षा भी है। जब बच्चे धर्म, संस्कार और सनातन मूल्यों के साथ बड़े होंगे, तभी आने वाला भविष्य सुरक्षित और मजबूत होगा। बड़ा परिवार न केवल देखने में सुंदर लगता है, बल्कि वह समाज को स्थिरता, शक्ति और निरंतरता भी प्रदान करता है।
*ये लोग रहे प्रमुखता से मौजूद*
मुख्य व्यवस्थापक अखिलेश अत्री, सह व्यवस्थापक मनोज पांडे, सुभाष गोयल, संतोष विजय, अनिल एडवोकेट, दामोदर शर्मा, कन्हैया लाल सैनी, घनश्याम सेन, प्रभु नारायण अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, लक्ष्मी नारायण सैनी, राजेश खंडेलवाल, सत्यनारायण झालानी, सुशील शर्मा, विधायक गोपाल शर्मा, तरुण कुमार दाधीच मौजूद थे।