कल जयपुर में प्रवासी दिवस का आगाज हुआ। इस आयोजन को लेकर राजस्थान सरकार का एक विज्ञापन देखने को मिला, जिसमें भजन लाल शर्मा के साथ राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, पीयूष गोयल व पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के फोटो है। इस विज्ञापन को देखकर राजस्थान की राजनीति की केमेस्ट्री को समझा जा सकता है व भजन लाल शर्मा के साथ साथ भूपेंद्र यादव, पीयूष गोयल व गुलाबचंद कटारिया के राजनीतिक कद का अंदाजा लगाया जा सकता है। वैसे केन्द्रीय मंत्रिमंडल में राजस्थान के गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल व कैलाश चौधरी है और यदि राज्यपाल की बात करें तो ओम माथुर सिक्किम के राज्यपाल है लेकिन भूपेंद्र यादव व गुलाबचंद कटारिया की फोटो आना राजस्थान की राजनीति समझने के लिए काफी है। तीनों केन्द्रीय मंत्रियो को दरकिनार कर भूपेन्द्र यादव का नाम आना भजन लाल शर्मा का निर्णय नहीं हो सकता, निश्चित रूप से इन नामों की पर्ची दिल्ली दरबार से मिली है। जब मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात कर आयोजन में आने का निमंत्रण दिया था। इस आयोजन में देशभर के उधोगपति भाग ले रहे हैं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की इस आयोजन में कोई भूमिका नहीं है। इस आयोजन के किसी भी सत्र में वसुंधरा राजे का संबोधन नहीं है। इस आयोजन में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम नदारद होना बहुत कुछ संकेत दे रहा है। इस आयोजन की आड़ में भजन लाल शर्मा ने अपनी भूमिका का बखूबी प्रदर्शन कर इशारा कर दिया है कि उनकी राजस्थान की राजनीति में क्या भूमिका है क्योंकि यह आयोजन उन्हीं के इर्द गिर्द घूम रहा है। कांग्रेस भजन लाल शर्मा को पर्ची सरकार से संबोधन कर कटाक्ष करती रही है लेकिन इसमें भी संदेह नहीं होना चाहिए कि जब तक दिल्ली दरबार का वरदहस्त भजन लाल शर्मा के उपर है, उनकी कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। पुर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भजन लाल शर्मा को चुनौती देती नजर आती है लेकिन उनको आयोजन से अलग रखने में भी दिल्ली दरबार की भूमिका ही नजर आती है।
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