नाम बदलना भाजपा की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। सड़कों, स्टेशनों, चौराहों के साथ-साथ निवर्तमान सरकाऱो द्वारा जारी की गई योजनाओं का नाम भी भाजपा सरकार बदलती रही है लेकिन इस बार भाजपा सरकार ने जो ग्रामीण भारत के लोगों की आजीविका का साधन है यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा का नाम बदल दिया है। इसके साथ ही काम के दिनों को लेकर केन्द्र व राज्य के बीच वित्तीय व्यवस्था को भी बदल दिया है। इसको लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है कि इस योजना का नाम बदलने के पीछे उसकी मंशा क्या है। विदित हो मोदी सरकार ने लोकसभा में विकसित भारत गारंटी फोर रोजगार और आजीविका मिशन 2025 पेश किया। इसका संक्षिप्त नाम वीबी-जी राम जी के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। देखा जाए तो भाजपा द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का सियासी लाभ लेने के लिए नई नई तकनीक ईजाद की जा रही है। राम मंदिर बनाने के लिए रथ यात्रा निकालने से लेकर बाबरी मस्जिद की जगह भव्य राम मंदिर का निर्माण तत्पश्चात मंदिर पर धर्म ध्वजा फहराने का काम किया लेकिन भाजपा को लगा कि राम नाम को भुनाने की अभी भी प्रबल संभावनाएं हैं। अब पिछले बीस साल से चल रही महात्मा गांधी के नाम पर चल रही योजना का नाम ही बदल दिया गया। आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने सामंतवादी व अंग्रेजी मानसिकता के नाम जब केन्द्र सरकार ने बदले थे तो इसका तहेदिल से समर्थन किया था, जिससे सामंतवादी मानसिकता से छुटकारा पाया जा सके लेकिन महात्मा गांधी के स्वतन्त्रता आन्दोलन में दिए गये योगदान को नकारा नहीं जा सकता और यदि उसी नाम को बदला जाए तो निश्चित रूप से नाम बदलने को लेकर भाजपा सियासत कर रही है। देखा जाए तो कोरोना काल में देश को आर्थिक तौर पर झकझोर कर रख दिया था। उस वक्त मनरेगा ग्रामीण भारत में दो वक्त की रोटी का सहारा बनी थी। मनरेगा में 100 दिनों के काम की गारंटी को इस योजना में 125 दिन तो किया लेकिन मानदेय नहीं बढ़ाया गया। जी राम जी में अधिकांश राज्यों में केन्द्र का फंड योगदान साठ प्रतिशत कम कर दिया गया। यह देखा गया है कि केन्द्र राज्यों को पहले ही जीएसटी के बकाया का भुगतान नहीं कर रहा, ऐसे मे ग्रामीण रोजगार में धन की कमी का असर सीधा उन लोगों पर पड़ेगा, जिनका चूल्हा इसी योजना से चलता है। मोदी सरकार 2047 को लेकर विकसित भारत का सपना दिखा रही है, जबकि 2047 आने मे अभी 22 साल का समय है, वर्तमान के समय में जरूरतों पर ध्यान देना होगा। 2047 में विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब लोगो के पास रोजगार होगा। यह तो वही बात हो गई कि गोद वाले को मारकर पेट वाले की आस की जाए। वैसे भी अस्सी करोड़ फ्री राशन लेने वाले लोगों को साथ में ले जाकर विकसित भारत का सपना मुंगेरीलाल के सपनों जैसा है। नाम बदलने के बजाय मनरेगा में जो अनियमितताए है और फंड का दुरूपयोग हो रहा है, केन्द्र सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए था। इसके साथ ही इस योजना में ऐसे काम करवाने को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो आमजन के काम आए। भगवान राम हर सनातनी के आराध्य देव हैं। राम नाम को भाजपा द्वारा बंधक नहीं बनाना चाहिए। यह भाजपा की सियासत का हिस्सा है कि जब विपक्षी दल इस नाम का विरोध करेंगे तो उन्हें राम विरोधी बताकर वोटों का ध्रुवीकरण किया ज
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