भाजपा, कांग्रेस व निर्दलीय विधायकों के कथित कारनामे अखबारों की सुर्खियां बटोर रहे हैं। भाजपा विधायक रेवंत राम डागा, कांग्रेस विधायक अनीता जाटव व निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत के काले कारनामे इस बात के गवाह है कि संवैधानिक पद पर बैठे महानुभावों ने जनता के पैसों की लूट मचा रखी है। सूत्रों की मानें तो यह तीनों विधायक अपने विधायक कोष की राशि की स्वीकृति को लेकर कमीशन वसूल रहे हैं। एक रूपये में से चालीस पैसे यह विधायक डकार रहे हैं। इस कृत्य में भाजपा के खींवसर विधायक रेवंत राम डागा के पुत्र अशोक हिंडौन की अनीता जाटव की दलाली करने वाले पवन शर्मा व बयाना की विधायक ऋतु बनावत के पति के दागी चेहरे भी जनता के समक्ष उजागर हुए हैं। इनके विडियो वायरल हो रहे हैं। हालांकि विडियो की सत्यता की पुष्टि आयुष अंतिमा नहीं करता है। अब विधायको के उपरोक्त कारनामों का पोस्टमार्टम करें तो जो राशि विधायक कोष के लिए आवंटित होती है, वह जनता का पैसा है। विकास कार्य प्रभावित न हो तो यह राशि आवंटित की जाती है। अब एक रूपये के काम की स्वीकृति को लेकर चालीस पैसे विधायक कमीशन के तौर पर डकार रहे हैं, जो अफसरों की वसूली का अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक रूपये में 15 पैसे का ही काम में लगता है और ठीकरा ठेकेदार के सर फोड़ दिया जाता है। विदित हो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि एक रूपया जनता के पास पहुंचते पहुंचते 15 पैसे का हो जाता है। राजस्थान की भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपनी दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियो का जश्न मना रही हैं। हर विधानसभा में विकास की गाथा के गुणगान करने वाले रथ घूम रहे हैं, इनमें रेवन्त राम डागा की विकास गाथा का भी गुणगान होना ही चाहिए। भजन लाल शर्मा बार बार कहते रहे हैं कि भाजपा पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। रेवंत राम डागा को लेकर भजन लाल शर्मा के पास क्या जबाब होगा, यह तो आने वाला समय ही निर्धारित करेगा। इसमें संदेह नहीं कि भाजपा सदैव कांग्रेस पर भ्रष्टाचार को लेकर हमलावर रही है। यह भारतीय राजनीति का इतिहास है कि जब तक पकड़ा न जाए, सभी ईमानदार व दूध के धुले हैं। यह हमारे सड़े गले सिस्टम का नतीजा है कि संवैधानिक पद पर बैठे महानुभाव जनता का खून चूस रहे है और इनका बाल भी बांका नहीं होता है। कांग्रेस हो या भाजपा जनता को भेड़ समझ रखा है और बारी बारी से उसकी ऊन उतार लेते हैं और जानता ठगी सी रह जाती है। देखा जाए तो देश का कोई भी राजनीतिक दल भ्रष्टाचार से अछूता नहीं है, हमाम में सब नंगे हैं। विकास के दावे करने वाली सरकार के विधायक खुद के विकास में लीन हैं।
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