चारणीसरा का लाल: दादी के ₹500 से दक्षिण भारत तक सफलता की उड़ान

AYUSH ANTIMA
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नागौर/तमिलनाडु। कहते हैं कि सच्चे इरादे और कड़ी मेहनत इंसान को शून्य से शिखर तक पहुंचा देती है। नागौर जिले की खड़काली ग्राम पंचायत के चारणीसरा गांव के निवासी भंवरलाल साहू (ठेकेदार) ने इसे अपने जीवन में साबित कर दिखाया है। सीमित संसाधनों और कठिन हालातों के बावजूद उन्होंने दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य के तिरुपुर शहर में अपनी मेहनत के दम पर ‘महादेव इंटीरियर’ कम्पनी खड़ी कर सफलता का परचम लहराया है। भंवरलाल साहू की संघर्ष यात्रा उस समय शुरू हुई जब उनके पास आगे बढ़ने के लिए कुछ भी नहीं था। ऐसे समय में दादी ने अपने आशीर्वाद के साथ ₹500 उनके हाथ में रखे, जिनसे उन्होंने परदेस जाने का किराया चुकाया। माता-पिता से मिले संस्कार और बुजुर्गों की दुआओं को ताकत बनाकर उन्होंने कठिन परिश्रम का रास्ता चुना और पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेहनत, ईमानदारी और अनुशासन को जीवन का मूल मंत्र मानने वाले भंवरलाल साहू अपनी सख्त कार्यशैली के लिए भी पहचाने जाते हैं। उनकी कम्पनी की सभी साइटों पर पूर्ण नशाबंदी लागू है, जहां किसी भी मजदूर या कारीगर को बीड़ी, सिगरेट, पान-मसाला या शराब के सेवन की अनुमति नहीं है। वे स्वयं भी नशे से दूर रहते हुए यह संदेश देते हैं कि मेहनत की कमाई में बुराइयों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ भंवरलाल साहू सामाजिक दायित्वों का भी बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। वे वर्तमान में जाट समाज के अध्यक्ष हैं और इस भूमिका में युवाओं को नशे से दूर रहने, शिक्षा के साथ-साथ हुनर सीखने तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही समाज में भाईचारा बनाए रखने और बुजुर्गों के सम्मान का संदेश दे रहे हैं। दादी के ₹500 से शुरू हुआ यह सफर आज चारणीसरा गांव और पूरे नागौर जिले के लिए गर्व की कहानी बन चुका है। भंवरलाल साहू ने यह सिद्ध कर दिया है कि मजबूत संस्कार, स्पष्ट लक्ष्य और अथक मेहनत के बल पर इंसान देश के किसी भी कोने में सफलता का झंडा गाड़ सकता है।

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