जो लोग भाजपा पर मत चोरी के आरोप लगा रहे थे,अंता का परिणाम उनके लिए झन्नाटेदार तमाचा: डॉ.राधा मोहनदास अग्रवाल

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राजस्थान प्रभारी डॉ.राधा मोहन दास अग्रवाल ने मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में मीडिया बाइट के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर करारा जवाब दिया। डॉ.अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस बेतुके आरोपों और भ्रामक बयानबाजी के जरिए राजनीतिक लाभ लेना चाहती है, जबकि अंता उपचुनाव का परिणाम भाजपा की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक आस्था का स्पष्ट प्रमाण है। डॉ.अग्रवाल ने कहा कि अंता चुनाव ने सिद्ध कर दिया है कि भाजपा शासन में चुनाव पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ संपन्न होते हैं। हमारी सरकार दिल्ली और राजस्थान दोनों जगह है और छह माह से चुनाव तय थे। यदि भाजपा चाहती तो प्रशासनिक नियंत्रण के आधार पर चुनाव को प्रभावित कर सकती थी, परंतु ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि 81 फीसदी मतदान यह दर्शाता है कि जनता ने स्वतंत्र होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। डॉ.अग्रवाल ने कहा कि जो लोग भाजपा पर मत चोरी के आरोप लगा रहे थे, अंता का परिणाम उनके लिए झन्नाटेदार तमाचा है। अंता ही नहीं, जम्मू-कश्मीर का भी उदाहरण दिया जा सकता है। श्रीनगर की अधिकांश सीटों पर भाजपा हार गई, फिर भी 70 फीसदी मतदान हुआ। यह भाजपा की लोकतांत्रिक निष्ठा तथा पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया का प्रमाण है। भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ.राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि अशोक गहलोत अब "टाइम से बाहर" हो चुके हैं। अगर हम जुमलेबाजी करते, तो बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली के चुनाव हम नहीं जीतते। हमारा विज़न और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संवाद सीधे जनता के दिल तक पहुंचता है, और यही हमारी जीत का आधार है। कांग्रेस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि 65 वर्षों तक कांग्रेस सिर्फ ‘गरीबी हटाओ’ के जुमले देती रही, लेकिन भाजपा ने पिछले 11 वर्षों में गरीब तबके के जीवन को वास्तविक रूप से बदला है। डॉ.अग्रवाल ने चुनाव आयोग को हाईजैक करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस 65 वर्षों तक चुनाव आयोग पर दबाव बनाती रही, इसी कारण उसे आज भी वही एहसास होता है। जबकि सत्य यह है कि चुनाव आयोग के पास अपनी कोई फोर्स नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएलओ, एसडीएम, जिला चुनाव अधिकारी, सभी राज्य सरकार द्वारा नियुक्त और नियंत्रित अधिकारी होते हैं। अगर ये अधिकारी गलत काम कर रहे हैं, तो गहलोत जी बताएँ कि जिम्मेदार कौन—उनकी अपनी नियुक्तियां या केंद्रीय चुनाव आयोग। उन्होंने कहा कि एसआईआर मतदाता सूची की पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसमें केंद्रीय चुनाव आयोग का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होता। डॉ.अग्रवाल ने कहा कि बिहार में कांग्रेस के सिर्फ छह विधायक किसी तरह जीत पाए हैं, और सुना है कि वे भी जेडीयू में जाने वाले हैं। ऐसे में गहलोत को सलाह देता हूं कि राजस्थान छोड़कर बिहार चले जाएं और अपने छह विधायकों को बचा लें।

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