शेयर बाज़ार का विरोधाभास: इंडेक्स आसमान में, पोर्टफोलियो पाताल में

AYUSH ANTIMA
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भारतीय शेयर बाज़ार का हाल आज एक अजीब विरोधाभास प्रस्तुत करता है। ऊपर से देखें तो दृश्य बेहद उजला दिखाई देता है—सेंसेक्स और निफ्टी मार्च 2025 के बाद तेजी से उछले हैं और अब अपने ऑल-टाइम हाई के दरवाज़े पर खड़े हैं। बैंक निफ्टी, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बीते महीनों में शानदार रिकवरी दर्ज कर चुके हैं। किसी अनजान दर्शक को लगेगा कि बाजार में उत्साह की लहर है और हर निवेशक लाभ में होगा लेकिन सतह के नीचे की तस्वीर बिल्कुल उलट है। आम निवेशक, खासकर रिटेल इन्वेस्टर्स के पोर्टफोलियो, लाल निशान में डूबे पड़े हैं। इंडेक्स की उड़ान और पोर्टफोलियो की गिरावट के बीच यह दूरी क्यों है—यही वह सवाल है, जिसने इस पूरी स्थिति को गंभीर और अध्ययन योग्य बना दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण है—मार्केट की संकीर्ण बढ़त। निफ्टी 500 इंडेक्स की 500 कंपनियों में से 376 कंपनियाँ यानी लगभग 75% स्टॉक अपने 52-वीक हाई से 10% से 75% नीचे ट्रेड कर रहे हैं। यानी बाजार की ऊँचाई केवल कुछ दिग्गज कंपनियों के कंधों पर खड़ी है, जबकि अधिकांश कंपनियाँ गिरावट के बोझ तले दबी हैं।
यही वजह है कि इंडेक्स चमक रहा है, और निवेशकों के पोर्टफोलियो पाताल में धँसे हुए हैं। रिटेल निवेशक जिन मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों पर अधिक भरोसा रखते हैं, उन स्टॉक्स में पिछले एक साल में भारी गिरावट आई है। कई लोकप्रिय और पिछली तेजी में चमके स्टॉक जैसे—तेजस नेटवर्क, प्राज इंडस्ट्रीज़, ओला इलेक्ट्रिक, जूपिटर वैगन्स, आर्के फोर्जिंग्स, सोनाटा सॉफ्टवेयर—अपनी एक साल की ऊँचाई से 47% से 65% नीचे आ चुके हैं।
कुछ साल पहले स्मॉलकैप और थीम-बेस्ड स्टॉक्स में जबरदस्त उछाल आया था। निवेशकर्ताओं ने उम्मीदों की उड़ान में इन कंपनियों में भारी निवेश किया लेकिन वैल्यूएशन बेहद महंगे हो चुके थे। 2024–25 में आया करेक्शन उसी हवा को निकाल गया, और वही पोर्टफोलियो आज निवेशकों की सबसे बड़ी पीड़ा का कारण बना हुआ है।
यह भी सच है कि भीड़ अक्सर बाजार की ऊँचाई पर प्रवेश करती है। जब स्टॉक्स कई गुना चढ़ चुके थे, तब लाखों नए निवेशकों ने FOMO में खरीदारी कर डाली। परिणामस्वरूप, जब करेक्शन ने दस्तक दी, तो इंडेक्स तो संभल गया, लेकिन पोर्टफोलियो नहीं। आज की स्थिति हमें यह याद दिलाती है कि बाजार सिर्फ ऊपरी लहरों का खेल नहीं होता। इंडेक्स की तेजी तभी सार्थक होती है जब व्यापक बाजार—यानी अधिकतर कंपनियाँ—ठोस आधार पर आगे बढ़ें। अभी वही हिस्सा कमजोर है। अभी बाजार दो हिस्सों में बँटा हुआ है—एक वह हिस्सा जो ऊँचाई पर दमक रहा है और दूसरा, जो अंधेरे में छूट गया है।
पोर्टफोलियो की रिकवरी तभी शुरू होगी, जब यह असमानता कम होगी और मिडकैप–स्मॉलकैप स्टॉक्स भी फिर से रफ्तार पकड़ेंगे। फिलहाल की यह स्थिति हमें संयम रखना, जोखिम को समझना और निवेश में विवेक अपनाने की सीख देती है। बाजार में चमक देखने भर से लाभ नहीं मिलता—लाभ तब मिलता है जब पोर्टफोलियो भी उसी रोशनी को महसूस करे।

*@ रुक्मा पुत्र ऋषि*

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