अलवर: जिले में बढ़ती ठंड और शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए पशुओं में डीहाइड्रेशन, बुखार, दस्त तथा गर्भपात जैसी समस्याओं की आशंका बनी रहती है। ऐसे में पशुओं के स्वास्थ्य एवं उत्पादन क्षमता को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को सावधान और जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। आपदा प्रबंधन कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.राजीव कुमार मित्तल ने बताया कि उचित देखभाल और संतुलित पोषण के साथ पशुओं को सर्दी से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पशुओं को दिन में चार बार ताज़ा और गुनगुना पानी पिलाएं। धूप निकलने पर ही पशुओं को बाहर निकालें और शाम 5 बजे से पहले ही वापस बाड़े में ले आएं। अत्याधिक सर्दी से बचाव के लिए बाड़े की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें तथा जूट की टाट या तिरपाल का उपयोग करें। पशुओं को वसा युक्त पौष्टिक संतुलित आहार एवं हरा चारा अवश्य दें ताकि उनका पाचन तंत्र मजबूत रहे। बाड़े में सूखी घास का बिछावन करना भी लाभदायक है। सर्दी के मौसम में गायों और भैंसों में मुंह पका-खुर पका रोग की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए इसका टीकाकरण अवश्य कराएं। विभाग द्वारा चलाए जा रहे महाअभियान में अब तक 9,06,250 पशुओं को टीके लगाए जा चुके हैं। अभियान की अंतिम तारीख 8 दिसंबर निर्धारित है। पशुपालक अपने नजदीकी पशुचिकित्सालय में संपर्क कर टीकाकरण कराएं।
संयुक्त निदेशक डॉ.रमेश चंद मीना ने बताया कि यदि कोई पशु शीतलहर की चपेट में आ जाए तो उसे तुरंत गर्म स्थान पर रखें, धूप या हल्की धूनी का सहारा लें और तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय में उपचार करवाएं। अत्यधिक सर्दी से प्रभावित पशु खाना-पीना छोड़ देता है और सुस्त पड़ जाता है, ऐसे में समय पर उपचार आवश्यक है।