बच्चों पर बढ़ती जासूसी — अभिभावकों की मजबूरी या सरकार की नाकामी

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): महानगरों में तेजी से बढ़ रही नशे की लत, गलत संगत, ऑनलाइन गेमिंग, ई-सिगरेट, देर रात पार्टी कल्चर और अनियंत्रित इंटरनेट एक्सेस के कारण माता–पिता अब बच्चों की गतिविधियों पर जासूसी एजेंसियों तक का सहारा लेने को मजबूर हैं। हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में यह सामने आया कि हर महीने औसतन 3–4 परिवार अपने ही बच्चों की गतिविधियों की जांच के लिए डिटेक्टिव एजेंसियों तक पहुंच रहे हैं, जो समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चिंताजनक संकेत है।

*सरकार पर लगा बड़ा सवाल, नशे का कारोबार क्यों नहीं रुक रहा*

संयुक्त अभिभावक संघ का कहना है कि राजस्थान में बच्चों और किशोरों के बीच नशे का फैलाव एक खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।

*संघ द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार*

* बीते 3 वर्षों में नाबालिगों में नशे से जुड़े मामलों में लगभग 42% की वृद्धि।

* ई-सिगरेट/वेपिंग से जुड़ी शिकायतों में 60% का इजाफा।

* स्कूलों के आसपास नशे की बिक्री की 300 से अधिक शिकायतें (2022–2024)।

* 13–19 वर्ष आयु वर्ग में नशे के कारण काउंसलिंग मामलों में 55% वृद्धि।
इसके बावजूद, नशे के कारोबार पर न तो प्रभावी रोक लग पाई है, न ही स्कूलों और कोचिंग सेंटरों के आसपास कोई कड़ा नियंत्रण दिखता है। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार एवं संबंधित विभाग अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में असफल रहे हैं। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि “आज हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि माता-पिता अपने बच्चों को बचाने के लिए जासूसी एजेंसियों तक पहुंच रहे हैं। यह अभिभावकों की नहीं, राज्य सरकार की विफलता का परिणाम है। स्कूलों और कोचिंग सेंटरों के बाहर नशा क्यों बिक रहा है। ई-सिगरेट पर बैन होने के बाद भी वेपिंग गैजेट्स खुलेआम कैसे मिल रहे हैं। सरकार बताए कि नशे के बढ़ते नेटवर्क को रोकने के लिए अब तक कौन-सी ठोस कार्रवाई हुई।”

*अभिभावकों के लिए संयुक्त अभिभावक संघ की सलाह*

* बच्चों से संवाद बढ़ाएं
डर या निगरानी से नहीं, भरोसे और बातचीत से ही वास्तविक समाधान निकलता है।

* बच्चों की दिनचर्या, मित्र मंडली और ऑनलाइन गतिविधियाँ समझें
किसी भी बदलाव को नजरअंदाज न करें।
  
* नशे या गलत संगत का संदेह हो तो तुरंत काउंसलर/मनोवैज्ञानिक से संपर्क करें
समस्या छुपाने से स्थिति बिगड़ती है।

* स्कूलों से पारदर्शिता की मांग करें। CCTV कवरेज, एंटी-नशा कैंपेन, काउंसलिंग, पेरेंट्स मीट—इन सब पर स्कूल की जिम्मेदारी तय हो।

* नशे का संदेह होने पर नजदीकी थाना/1098/181 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं

*सरकार के लिए संयुक्त अभिभावक संघ की मांग*

* राजस्थान में Anti-Drug Task Force को सक्रिय और जवाबदेह बनाया जाए।

* स्कूल–कॉलेज–कोचिंग सेंटरों के 500 मीटर दायरे में नशा बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई।

* सभी जिलों में नाबालिगों के लिए विशेष काउंसलिंग व हेल्पलाइन।

* वेपिंग/ई-सिगरेट पर प्रभावी मॉनिटरिंग और दुकानों की तत्काल सीज कार्रवाई।

* पुलिस और शिक्षा विभाग की संयुक्त त्वरित कार्रवाई टीम बनाई जाए।

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