लगातार बढ़ रही बच्चों की आत्महत्या की घटनाएँ: अभिभावकों, स्कूलों और समाज की संवेदनहीनता पर संयुक्त अभिभावक संघ का कड़ा सवाल

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राजस्थान में छोटे-छोटे बच्चों द्वारा आत्महत्या जैसे चरम कदम उठाए जाने की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। केवल नवंबर महीने में ही पाँच से अधिक मासूम बच्चों ने अपनी जान दे दी और दुखद यह है कि समाज, अभिभावक और स्कूल, सरकार, प्रशासन इन घटनाओं को सिर्फ ‘एक और मामला’ मानकर आगे बढ़ते जा रहे हैं। सबसे ताज़ा घटना गुरुवार को राजधानी जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में 7वीं कक्षा के छात्र ने बुआ के घर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।

*इससे पहले*

* जयपुर (1 नवंबर): नीरजा मोदी स्कूल की चौथी मंज़िल से कूदकर अमायरा की दर्दनाक मौत।

* अजमेर (दहली गेट): 5वीं की छात्रा ने आत्महत्या कर ली।

* नीम का थाना: एक और छात्र ने जान दे दी।

* करौली: एक और मासूम की मौत।

* जयपुर–आगरा रोड: 9वीं कक्षा के छात्र की दुर्घटना में मृत्यु।
लगातार हो रही इन घटनाओं के बीच समाज की चुप्पी और अभिभावकों का मौन सबसे बड़ा प्रश्न बनकर सामने खड़ा है।

*समाज की संवेदनहीनता और अभिभावकों की अनदेखी सबसे बड़ा कारण: संयुक्त अभिभावक संघ*

संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा: “किसी भी अभिभावक को दूसरे के बच्चे की मौत पर उतना दुख नहीं होता, जितना अपने घर में दर्द आने पर होता है और तब चीखें होती हैं, धरने होते हैं, जांच बैठती है, रिपोर्ट आती है…लेकिन तब तक अगली मौत हो चुकी होती है।” संघ का कहना है कि बच्चों की आत्महत्या के पीछे केवल स्कूल जिम्मेदार नहीं, केवल सरकारी तंत्र जिम्मेदार नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक लापरवाही जिम्मेदार है। बच्चों को सुविधाएँ तो दी जा रही हैं, लेकिन— समय, भावनात्मक सुरक्षा, मानसिक संवाद और समझ— कहीं खोते जा रहे हैं। स्कूल फीस, ब्रांड और स्टेटस के पीछे भागती दुनिया में बच्चों का डर, दबाव, अकेलापन और मानसिक स्वास्थ्य अनदेखा कर दिया गया है। प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि “सबसे कड़वी सच्चाई यह है कि आज बच्चों की मौतें समाज के लिए ‘सिर्फ संख्या’ बनती जा रही हैं। जब तक मौत अपने घर न आए, किसी को दर्द महसूस नहीं होता। कब तक हम दूसरों के बच्चों की मौत को तमाशे की तरह देखते रहेंगे। आज जो चुप्पी है, वह कल किसी भी परिवार को अपनी चपेट में ले सकती है। अब समय आ गया है कि अभिभावक एकजुट हों, सवाल उठाएँ और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्कूलों को जवाबदेह बनाना ही होगा, माता–पिता को जागरूक बनाना ही होगा और समाज को संवेदनशील बनाना ही होगा अन्यथा आने वाली पीढ़ी अंधकार में खो जाएगी।”

*संयुक्त अभिभावक संघ का प्रदेश के अभिभावकों से आह्वान: आओ मिलकर बनाए स्कूल स्तर पर बनाएं अभिभावक संघ*

संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए कानूनों में अभिभावकों को प्राथमिकता देने की बातें तो हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अभिभावकों को किसी भी समिति में शामिल नहीं किया जा रहा है। पिछले 5 वर्षों से संघ लगातार मांग कर रहा है कि स्कूल स्तर की सभी समितियों में अभिभावक प्रतिनिधि शामिल किए जाएँ, लेकिन न स्कूल प्रशासन जिम्मेदारी निभा रहा है और न ही सरकार और प्रशासन गंभीरता दिखा रही है। इसीलिए संघ ने निर्णय लिया है कि प्रदेशभर के हर स्कूल में जागरूक, जिम्मेदार और सक्रिय अभिभावकों की टीम गठित करने का आह्वान किया है, जो स्कूलों में ना केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करवाएगी बल्कि अभिभावकों के अधिकार और समस्याओं का निस्तारण भी सुनिश्चित करवाएगी। अभिभावक टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे संघ के हेल्पलाइन नंबर 9772377755 पर अपनी जानकारी साझा कर जुड़ सकते है।

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