भाजपा झुंझुनूं जिलाध्यक्ष पर हर्षिनी कुलहरी का मनोनयन कर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का संदेश देने का प्रयास किया लेकिन शायद उनसे भी ज्यादा संगठन का अनुभव रखने वाली नेत्री भाजपा मे मौजूद हैं। उनके मनोनयन होते ही भाजपा मे आक्रोश के स्वर मिले। बर्खास्त भाजपा प्रवक्ता ने उनके मनोनयन पर गंभीर आपति दर्ज करते हुए सार्वजनिक रूप से बयान दिए कि उनका नाम पैनल में नहीं था और ना ही नवनियुक्त जिलाध्यक्ष जो मापदंड होते हैं उनको पूरा करती है। उनकी एक ही प्रतिभा है कि वे पूर्व सांसद की पुत्रवधू है। प्रदेश प्रवक्ता ने बहुत से नाम गिनाए, जिनको वर्षों से संगठन का अनुभव था लेकिन उनको दरकिनार करते हुए कमान हर्षिनी कुलहरी को सौंपी गई। झुंझुनूं जिले में भाजपा की गुटबाजी से शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा और इसी गुटबाजी का परिणाम है कि नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अभी तक अपनी कार्यकारिणी नहीं बना पाई है। विदित हो शेखावाटी के चूरू व सीकर जिलों के नवनियुक्त जिलाध्यक्षो ने अपनी कार्यकारिणी बना ली है। अभी हाल ही मे कांग्रेस ने भी महिला सशक्तिकरण की तरफ कदम बढ़ाते हुए मंडावा विधायक सुश्री रीटा चौधरी को कांग्रेस जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। रीटा चौधरी भी मंडावा विधानसभा से आती है व हर्षिनी कुलहरी के ससुर को विधानसभा चुनावो में हराया भी है। वैसे यदि झुन्झुनू उपचुनाव को अपवाद के रूप में देखें तो झुन्झुनू जिला कांग्रेस का अजेय गढ़ रहा है। रीटा चौधरी के समक्ष भी पुराने व युवा कांग्रेस के नेताओं में समन्वय स्थापित करने की चुनौती रहेगी। पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष पर पार्टी की खिलाफत करने के गंभीर आरोप पूर्व मंत्री डॉ.राजकुमार शर्मा ने लगाए और उन्होंने उनके साथ एक आयोजन में मंच साझा करने से इंकार कर दिया। जाट बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण दोनों राजनीतिक दलों ने जातिवाद का कार्ड खेलते हुए जाट समुदाय से ही जिलाध्यक्ष बनाए हैं। आगामी नगर निगम व पंचायत चुनावों में दोनो जिलाध्यक्षो की अग्नि परीक्षा होगी। इसके साथ ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष पर भी भाजपा जिलाध्यक्ष की तरह पुराने व युवा चेहरों में समन्वय स्थापित करने की चुनौती रहेगी। यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि दोनों महिला नेत्रियों में कौन अपना वर्चस्व कायम रखेगा।
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