मदन राठौड़ की नई टीम का इंतजार खत्म*

AYUSH ANTIMA
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मदन राठौड़ ने करीब एक साल पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कमान संभाली थी। इस अंतराल में राठौड बिना अपनी सेना के सेनापति के रूप में काम कर रहे थे। मिडिया ट्रायल भी चल रहा था कि कुछ सांसदों, विधायकों व मंत्रियों को संगठन में लिया जाएगा, जिससे प्रदेश की टीम मजबूत बनी रहे लेकिन नई टीम को देखकर ऐसा कुछ प्रतीत नहीं होता। अपनी नई टीम में नौ उपाध्यक्ष, चार महामंत्री, सात मंत्री, प्रदेश प्रवक्ता, मिडिया प्रभारी व कोषाध्यक्ष आदि शामिल हैं। यदि इस कार्यकारिणी को झुन्झुनू जिले के संदर्भ में देखे तो जिले का प्रतिनिधित्व नगण्य ही है। मुकेश दाधीच पहले भी उपाध्यक्ष थे और अब इनको इसी पद पर रिपीट किया गया है लेकिन संगठन की बात करें तो यह तो राठोड व मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ही बता पायेंगे, जिनकी मेहरबानी से दुबारा कार्यकारिणी में स्थान मिला है लेकिन जमीनी स्तर पर देखें तो मुकेश दाधीच कोई जनाधार वाले नेता नहीं है। जिले की एक महिला नेत्री, जो पूर्व सांसद व विधायक रह चुकी है, इसके साथ ही वो जाट लाबी से भी आती है। इस नई टीम में जगह नहीं मिलना आश्चर्यजनक तो है ही, साथ ही जिले में खस्ता हालत भाजपा संगठन के लिए शुभ संकेत भी नहीं है। सरकार में तो जिले का प्रतिनिधित्व पहले था ही नहीं, अब संगठन में भी जिले को दरकिनार करना सरकार व संगठन में बैठे नेताओं की उस सोच को इंगित करता है कि जिले को प्रदेश नेतृत्व किस दृष्टि से देख रहा है। झुन्झुनू जिले को जाट बाहुल्य क्षेत्र कहकर प्रचारित किया जाता है। पिछली कार्यकारिणी में संतोष अहलावत को जगह दी गई थी लेकिन इस कार्यकारिणी में उन्हें जगह नहीं मिली है। देखा जाए तो जिले में भाजपा संगठन धड़ेबाजी की महामारी के चलते आईसीयू में है।‌ इस गुटबाजी को लेकर विधानसभा चुनावों में इसका खामियाजा भुगत चुकी है। नवनियुक्त भाजपा जिलाध्यक्ष के बाद से ही उनकी कार्यशैली को देखकर ऐसा नहीं लगा कि संगठन को मजबूती प्रदान करने के साथ ही गुटबाजी को खत्म करने को लेकर प्रयास किये हो। आयातित नेताओं के साथ मंच साझा करना व वही चिर परिचित चेहरों से घिरे रहना भाजपा के प्रति निष्ठा व समर्पण भाव वाले कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रहा है और पुराने कार्यकर्ताओ ने कार्यक्रमो से दूरी बनानी शुरू कर दी है। नवनियुक्त भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी अपनी टीम का ऐलान नहीं किया है, ज्योंही टीम का ऐलान होगा, वह इस गुटबाजी की आग में घी का काम होगा।

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