दिल्ली (श्रीराम इंदौरिया): दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध मैत्रेयी महाविद्यालय में स्थापित विदुषी अरुंधति भारतीय ज्ञान-परम्परा केन्द्र द्वारा संचालित छात्र इंटर्नशिप कार्यक्रम (जनवरी–जून 2026) की चयन-प्रक्रिया महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो.हरित्मा चोपड़ा के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा उप-प्राचार्या प्रो.ज्योति सिंह के सहयोग एवं समन्वय में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। केन्द्र के नोडल अधिकारी एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के डिप्टी डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ.प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि इस इंटर्नशिप हेतु महाविद्यालय के विभिन्न विभागीय छात्राओं से 251 आवेदन प्राप्त हुए, जो भारतीय ज्ञान-परम्परा के प्रति विद्यार्थियों की जागरूकता, जिज्ञासा एवं गहन शैक्षणिक रुचि का स्पष्ट प्रमाण है। आवेदनों के परीक्षण के उपरान्त 14 नवम्बर 2025 को संवाद-सत्र एवं साक्षात्कार आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञ-मण्डल ने आवेदकों की विषय-समझ, अभिरुचि, प्रस्तुति-कौशल तथा केन्द्र की गतिविधियों में उनके संभावित योगदान का परीक्षण किया।
सभी पहलुओं के समग्र मूल्यांकन के पश्चात् 35 छात्र-प्रशिक्षुओं (इंटर्न्स) का अनन्तिम रूप से अवैतनिक स्वरूप में चयन किया गया। चयनित प्रशिक्षु हैं— रसिता सिंह, सौम्या, आंचल झा, वैशाली, स्वाति पाठक, साक्षी त्रिपाठी, अपेक्षा, परी कथूरिया, प्रेरणा शर्मा, निष्ठा नेगी, याशिका मन्कर, प्रगति जैन, सुहानी, हरसिमरत कौर, हर्षिता मिश्रा, अनघा सी. आर., आयना तिवारी, हर्षिता सोलंकी, छवि कुमारी, भूमि श्रीवास्तव, राधिका शर्मा, संस्कृति राय, अक्षरा सक्सैना, मानसी गुप्ता, एशबी साह, एस. समीक्षा, कशिश, राशि सिंह, श्रेया पाठक, इशिका, रिया अग्रवाल, हिमांशी बिष्ट, जया यादव, आशना कौशिक तथा कृतिका कुमारी। इसके अतिरिक्त प्रतीक्षा-सूची में विधि यादव, आशिका वर्मा, कोमल, ऋचा सिंह तथा सिद्धि दुबे को स्थान दिया गया है, जिन्हें अवश्यकतानुसार अवसर प्रदान किया जाएगा। चयन-परिणाम जारी करते हुए डॉ.सिंह ने कहा कि —“हमारे केन्द्र के लिए यह अत्यन्त प्रसन्नता का विषय है कि हमें कला, वाणिज्य और विज्ञान —तीनों संकायों से योग्य, जिज्ञासु एवं गंभीर-रुचिशील प्रशिक्षुओं का चयन करने का सुअवसर मिला। इस चयन-प्रक्रिया में महाविद्यालय के विविध विषयों एवं शैक्षणिक धाराओं का जो संतुलित एवं व्यापक प्रतिनिधित्व परिलक्षित होता है, वह केन्द्र की वास्तविक अंतरविषयी दृष्टि को पूर्णतः मूर्त रूप प्रदान करता है।”
गौरतलब है कि चयनित प्रशिक्षुओं को 20 नवम्बर 2025 तक अपना प्रभार ग्रहण–पत्र (ज्वाइनिंग-लेटर) तथा आवश्यक औपचारिक दस्तावेज़ केन्द्र कार्यालय में प्रस्तुत करें। औपचारिकताएँ पूर्ण होने के बाद ही सभी प्रशिक्षु 1 जनवरी 2026 से 30 जून 2026 तक केन्द्र की विविध शैक्षणिक, अनुसंधान-संबद्ध, तकनीकी, मीडिया एवं आयोजन-समन्वयन गतिविधियों से औपचारिक रूप से सम्बद्ध रहेंगे। विदुषी अरुंधति भारतीय ज्ञान-परम्परा केन्द्र इस चयन-प्रक्रिया को भारतीय बौद्धिक परम्परा के संवर्धन, नवाचार तथा अंतरविषयी अधिगम की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में देखता है।