बालिकाओं को शिक्षा से वंचित आखिर क्यों

AYUSH ANTIMA
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पिलानी शिक्षा की नगरी के रूप में विख्यात रही है। यहां के भामाशाहों ने शिक्षा के मंदिरों की स्थापना इस सोच के साथ की थी कि पिलानी व आसपास के बच्चों के अभिभावक उनको गुणवत्ता से भरपूर व सस्ती शिक्षा दिला सके। इनमें स्कूली शिक्षा को लेकर बिरला, पांडिया, गोयनका आदि प्रमुख थे। कालेज व पीजी शिक्षा के लिए आसपास के क्षेत्रों मे मशहूर एमके साबू पीजी महाविद्यालय था। इस महाविद्यालय मे आसपास की हजारों बालिकाएं शिक्षा ग्रहण करती थी लेकिन कालेज के संचालकों ने इस सत्र से इस महाविद्यालय को बंद करने का निर्णय लिया, जो कि बालिकाओं को शिक्षा से वंचित करने वाला फैसला है। सूत्रों की मानें तो इस महाविद्यालय को सरकारी अनुदान मिलने के साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से भी आर्थिक सहायता मिलती रही है। जिस तरह से चिड़ावा की शान रही सैकड़ों साल पुरानी डालमिया स्कूल को बंद कर उसको बेच दिया गया, वही खेल अब इस महाविद्यालय को लेकर खेलने की तैयारी की जा रही है। यह भी दुर्भाग्य या फिर पिलानी के जन प्रतिनिधियों की पिलानी के प्रति सौतेला व्यवहार ही रहा कि यहां एक भी सरकारी महाविद्यालय नहीं है। सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती रही है लेकिन यह सरकारी समारोहों की ही शोभा बढ़ा रहा है। आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने हमेशा जनहित व सामाजिक सरोकार के मुद्दों को प्राथमिकता दी है। सरकारी महाविद्यालय खोलने को लेकर सरकार के समक्ष भूमि अधिग्रहण व भवन की समस्या सामने आती है। इस समस्या के समाधान को लेकर पिलानी विधानसभा के माननीय जनप्रतिनिधियों से आह्वान है कि इस भवन का अधिग्रहण कर सरकारी महाविद्यालय खोलने के लिए सरकार पर दबाव बनाए, जिससे पिलानी व आसपास की बालिकाओं को उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहना पड़े। बालिका शिक्षा को लेकर पिलानी विधानसभा के जन प्रतिनिधियों व नेताओं से आह्वान है कि इस मानवीय मुद्दे पर संवेदनशीलता का परिचय दे।

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