हिन्दी दिवस पर विशेष.....

AYUSH ANTIMA
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भारत विविधताओं से भरा देश है। इस देश का यह सौन्दर्य भी है कि यहां बहुत सी भाषाएं प्रचलित है और सभी को सम्मानित दृष्टि से देखा जाता है लेकिन इन भाषाओं में हिन्दी का विशिष्ट स्थान है। हिन्दी भाषा भारत को एक सूत्र मे पिरोने में सहायक भी है। 14 सितम्बर का दिन हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन हिन्दी भाषा को संविधान सभा ने राजभाषा का दर्जा दिया था। हिन्दी के सम्मान का अंदाजा हिन्दी के प्रसिद्ध कवि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की निम्न पंक्तियों से लगाया जा सकता है।
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति के मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय की सूल।।
देखा जाए तो भारत में हिन्दी एक भाषा ही नहीं बल्कि भारत के बड़े हिस्से में सभ्यता ओर संस्कृति की पहचान भी है।‌ हिन्दी कविता, कहानी, नाटक, साहित्य व पत्रकारिता के क्षेत्र में समृद्ध भाषा भी है। हिन्दी दिवस मनाने का उद्देश्य आमजन को हिन्दी भाषा से परिचित करवाने साथ ही इस राजभाषा का प्रचार-प्रसार व बढ़ावा देना है। यह देखा गया है कि शहरी क्षेत्र के लोग हिन्दी बोलने से संकोच करते हैं व अंग्रेजी को ज्यादा बढ़ावा दिया जाता है। अंग्रेजी बोलना या सीखना कोई बुरी बात नहीं परन्तु हिन्दी भाषा के प्रति संकीर्ण मानसिकता का परित्याग करना होगा। भारत सरकार ने यद्धपि हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दे रखा है लेकिन आजादी के सतर साल बाद भी हिंदी को वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वह हकदार थी। इसके लिए प्रचार प्रसार करने के साथ ही विज्ञापनों का सहारा लेना पड़ता है। हम आज भी विदेशी भाषा के चंगुल से मुक्त नहीं हो पाए या यह कहें कि यह मानसिकता गुलामी का प्रतीक है कि अंग्रेजों के शासन की वजह से आज भी हम अंग्रेजी भाषा के गुलाम है। यह भी देखा गया है कि हिन्दी को लेकर आवाज बुलंद करने वाले, इसको लेकर आंदोलन करने वाले खुद अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों मे पढ़ाना पसंद करते है। सरकारी प्रतिबद्धता की कमी एवं स्वार्थपरक राजनीति के चलते हिन्दी व हिंदी भाषी की खिल्ली उड़ाई जाती है। एक दिन केवल आयोजन करने से इसको वह सम्मान नहीं मिल पाएगा, जो राजभाषा को मिलना चाहिए। 
हिन्दी के उत्थान की जिम्मेदारी केवल सरकार की ही नहीं है बल्कि हिन्दी भाषाई लोगो को राजभाषा के प्रति नकारात्मक मानसिकता का त्याग करना होगा व हिन्दी के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा ताकि हिन्दी बोलने वाले को गर्व हो व हिन्दी को मान सम्मान मिले तभी हिन्दी दिवस मनाना सार्थक होगा। हिन्दी दिवस पर आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) के सभी सम्मानित पाठको को आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) परिवार की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं।

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