अपने भक्तों के श्राप अथवा वरदानों को सत्य करने के लिए भगवान लेते है अवतार: पंडित तिवाड़ी

AYUSH ANTIMA
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चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): भगवान के पृथ्वी पर अवतार धारण करने के अनेक कारण होते है, जिसमे सबसे प्रमुख कारण है धर्म की स्थापना करना। भगवान ने स्वयं कहा है कि ज़ब ज़ब धर्म की हानि होती है तब तब धर्म की पुनः स्थापना के लिए मै अवतार धारण करता हूं। इसके अलावा अपने दिये वरदानों को सत्य करने, अपने भक्तों के श्राप अथवा वरदानों को सत्य करने के लिए भी भगवान अवतार धारण करते है। उक्त विवेचना वाणी भूषण पण्डित प्रभुशरण तिवाड़ी ने शहर के पुराने पोस्ट ऑफिस के पास चल रहीं श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव प्रसंग पर व्यास पीठ से प्रवचन देते हुए कही। इस अवसर पर तिवाड़ी ने भगवान श्रीराम के चरित्र को भी विस्तार से बताया तथा आह्वान किया कि सभी जन मर्यादा पुरुषोत्तम के चरित्र को अपने जीवन मे उतारने का प्रयत्न करें। कथा मे भक्त राजा अंबरीश की कथा गंगा अवतरण की कथा का भी सुन्दर वर्णन किया गया। कथा मे सजाई गयी राम विवाह एवं कृष्ण जन्म जन्मोत्सव की सजीव झांकी ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान सुंदर भजनों की प्रस्तुतियों ने वातावरण में भक्ति रस घोल दिया। इससे पूर्व कथा में मुख्य यजमान रामवतार शर्मा- कलावती देवी व परिवार के सदस्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत व व्यास पूजन किया। इस दौरान महेन्द्र शर्मा, अशोक शर्मा, प्रमोद शर्मा, अनिल शर्मा, वेद प्रकाश, सुशील कुमार, विनोद कुमार लाम्बीवाला, कमला प्रसाद मोदी, नृसिंह बाछुका, ओमप्रकाश बीजनेवाला, अरुण शर्मा सेहीकला, गोपाल चौहान, राजकुमार बीजनेवाला, श्यामसुंदर खंडेलवाल, रामवतार शर्मा, गंगाधर शर्मा, विनोद पुजारी, इंद्र दायमा, सुनील ककरानिया, प्रदीप लांबीवाला, पू न पा चेयरमैन शंकरलाल वर्मा, जय प्रकाश वर्मा, सेवानिवृत कोषाधिकारी ओमप्रकाश टेलर, सिद्धार्थ शर्मा, श्याम सुंदर साखुवाला, संजय शर्मा श्योपुरा, विश्वनाथ ढाढीटिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष मौजूद रहे मौजूद रहे।

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