बहरोड़: "जब आंखों ने अरमान लिया, मंजिल को अपना मान लिया। फिर मुश्किल क्या और आसान क्या जब ठान लिया तो ठान लिया।।" इन्हीं शब्दों को चरितार्थ करके दिखाया है डांस दीवाने फेम व मंथन फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट की दिव्यांग ब्रांड एम्बेसडर मोनिका भारती ने। मंथन सचिव डॉ.सविता गोस्वामी ने बताया कि बहरोड़ निवासी मोनिका जन्म से ही दृष्टि बाधित थी, ऑपरेशन के बाद कुछ रोशनी लौटी। जिसके साथ उसका जीवन आसान नहीं था लेकिन फिर भी उन्होंने नृत्य की अपनी प्रतिभा को उभारा, गत 15 वर्षों से निरंतर प्रयास जारी रख कथक में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की। उनकी इस तपस्या का परिणाम उनको जवाहर नवोदय विद्यालय पाटन में नृत्य (कथक) शिक्षिका के रूप में चयनित होकर मिला। इस सफलता पर मंथन फाउंडेशन द्वारा कार्यालय में उनके लिए स्वागत व सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। फूल माला पहनाकर, दुपट्टा ओढ़ाकर, उपहार व स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका सम्मान किया तथा मिठाई खिलाकर सभी ने बधाई दी। इस दौरान अपने वक्तव्य में मोनिका ने जन्म से लेकर अब तक की कहानी अपनी जुबानी सुनाई, जीवन के उतार चढ़ाव, नृत्य के लिए उनका संघर्ष, लगन व समर्पण की दास्तान सुनाते हुए इस सफलता का श्रेय अपनी नानी व मामा-मामी को दिया। सम्मान कार्यक्रम में मोनिका के मामा संजीव कुमार खरेरा, मंथन संस्थापक डॉ.पीयूष गोस्वामी, सचिव डॉ.सविता गोस्वामी, संरक्षक, बहरोड़ इकाई अध्यक्ष, चार्टर अध्यक्ष, महिला इकाई संरक्षक वसंती यादव, रेखा अग्रवाल, अंकित सैन व गोविंद शर्मा उपस्थित रहे।
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