वैसे तो राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सियासी गलियारों में चर्चा में रहती है। अपनी धार्मिक यात्राओ को लेकर भी अपने राजनीतिक विरोधियों पर सटीक निशाना साधती रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व वसुंधरा राजे की राजनीतिक अदावत से शायद ही कोई अनभिज्ञ हो लेकिन इसके बावजूद वसुंधरा राजे राजस्थान के राजनीतिक पिच पर लगातार बल्लेबाजी करती देखी जा सकती है। राजस्थान की सियासत में वसुंधरा राजे का कद क्या है, इसका अंदाजा बांसवाड़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में देखने को मिला। वाकया था मंच पर उपस्थित नेताओं का अभिवादन स्वीकार करने का। मंच पर उपस्थित उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी, केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा समेत बहुत से नेता उपस्थित थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेताओं का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे तो जब उनकी नजर वसुंधरा राजे पर पड़ी तो सभी नेताओं को छोड़कर राजे के पास पहुंच जाते हैं। नरेन्द्र मोदी वसुंधरा राजे का हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार करने के साथ ही करीब एक मिनट तक वसुंधरा राजे से चर्चा करते दिखाई दे रहे हैं। यह विडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल हो रहे विडियो को लेकर इस मुलाकात के अपने अपने ढंग से सियासी मायने निकाल रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे का जलवा बरकरार है। जबकि यह अवधारणा बन चुकी थी कि भाजपा ने राजे को हासिये पर धकेल दिया है। सियासत की दृष्टि से वसुंधरा राजे सियासत के केन्द्र में दिखाई दे रही है। बीते दिनों जोधपुर में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से उनकी मुलाकात जो करीब बीस मिनट तक चली थी, राजस्थान की राजनीति का पारा चढ़ा दिया था। नरेन्द्र मोदी व वसुंधरा राजे की इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक कयास लगा रहे हैं कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसी नेता के साथ अलग से संवाद करते हैं तो उस नेता के महत्व को समझा जा सकता है। निश्चित रूप से नरेन्द्र मोदी व वसुंधरा राजे के बीच के रिश्तों में जमी बर्फ शायद पिघल चुकी है। पिछले दिनों वसुंधरा राजे ने जब दिल्ली मे नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी तब राजनीतिक माहोल में गर्मी आई थी लेकिन इन मुलाकातों के वसुंधरा राजे की दृष्टि में आशातीत परिणाम अभी तक देखने को नहीं मिले हैं। वैसे वसुंधरा राजे संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है लेकिन राजे ने कभी भी इस पद को लेकर केन्द्रीय राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई। इतना जरूर है कि राजे अपनी राजनीतिक हैसियत को लेकर संतुष्ट नहीं हैं और वसुंधरा राजे राजस्थान के राजनीतिक मैदान में ही बनी रहना चाहती है लेकिन नरेंद्र मोदी व वसुंधरा राजे की इस मुलाकात ने राजनीतिक हलचल पैदा जरूर कर दी है।
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