खतरे में है धरा हमारी,
अस्तित्व खतरे में लगता है।
बढ़ रहा है प्रदूषण,
जीवन पर संकट दिखता है।
कट रहे हैं पेड़ निरंतर,
जड़े हिल चुकी है,
सांसों की कीमत,
हमने कोरोना में देखी है।।
अगर समय रहते हुए हमने,
इनकी कीमत को नहीं पहचाना
तो वह दिन दूर नहीं,
जब लिखा जाएगा,
बहुत बड़ा अफसाना।।
आओ संकल्प ले मनु,
इस धरा को हरा भरा बनाए।
एक पेड़ मां के नाम जरूर लगाए।।
फिर देखना हमारी धरा,
शस्य श्यामला होगी।
कहे मनु हे मानव!
तब हर चेहरे पर
अमिट मुस्कान होगी।।।