यदि दूध को बिल्ली की देखभाल के लिए छोड़ दिया जाए तो उस दूध को ईश्वर भी नहीं बचा सकता। राजस्थान में जिस संस्था आरपीएससी को सरकारी नोकरियों के लिए अधिकृत कर रखा है, यानी जो लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के लिए जिम्मेदार है, उसी के पदाधिकारी पेपर लीक जैसे संगीन अपराध में लिप्त पाए जाए तो इससे दुखद वाक्या हो ही नहीं सकता। राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री व कांग्रेस के महासचिव सचिन पायलट ने पूर्व अशोक गहलोत सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में भी आरपीएससी पर सवाल खड़े किए थे। हाईकोर्ट ने कथित पेपर लीक में लिप्त बहुचर्चित एसआई परीक्षा को रद्द कर दिया है। इसके रद्द करने के साथ ही आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी की है। पायलट ने इसको लेकर सिस्टम में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आयोग के दो सदस्यों को तुरंत प्रभाव से हटा देना चाहिए, जिनमे एक सदस्य मंजू शर्मा ने तो तत्काल प्रभाव से इस्तीफ़ा दे दिया है और आशा है कि दूसरी सदस्य संगीता आर्य भी 2-3 दिन में इस्तीफ़ा दे सकती है। अगर ऐसा नहीं होता तो यह सरकार का अधिकार क्षेत्र है कि उनको हटाने में कोन सी प्रकिया काम में लेती है। यदि कोई सदस्य पद नहीं छोड़ते हैं तो भविष्य में जो भी परीक्षाएं होंगी संदेह के घेरे में ही रहेगी। पायलट ने जब अजमेर से जयपुर तक मार्च किया था तब भी उनकी प्रमुख मांगों में आरपीएससी के बदलाव के साथ ही सिस्टम में पारदर्शिता थी। अशोक गहलोत ने पायलट की मांग को दरकिनार किया, इसका एक प्रमुख कारण हो सकता है कि इसकी जद में बड़े मगरमच्छ भी आ सकते थे, जिनको गहलोत का संरक्षण मिला हुआ था। वैसे देखा जाए तो हर सरकारी विभाग भ्रष्टाचार से अछूता नहीं है। जेपी आंदोलन में जयप्रकाश नारायण ने एक ही नारा दिया था समग्र क्रान्ति व सिस्टम में आमूलचूल परिवर्तन। परन्तु दुर्भाग्य कि भ्रष्टाचार रुपी बीमारी से कोई भी राजनीतिक दल अछूता नहीं है। जो नहीं पकड़ा जाए, वही ईमानदार की श्रेणी में आता है। जिस तरह से एसआई परीक्षा रद्द होने से युवाओ के सपनों पर कुठाराघात हुआ है, उसके लिए वह युवा वर्ग दोषी नहीं, जिसने अपनी मेहनत और ईमानदारी के बलबूते यह मुकाम हासिल किया है, उसके लिए वह भ्रष्ट तंत्र जिम्मेदार है, जिसने पेपर लीक किया और बेईमानी से चयनित हो गये। अब उपरोक्त प्रकरण को लेकर यही कहा जा सकता है कि जब तक बिल्ली को दूध की रखवाली के लिए रखा जाएगा तब तक देश के युवा उस दूध से वंचित ही रहेंगे और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा।
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