झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): जिले के मंडावा पंचायत समिति के हनुमानपुरा ग्राम पंचायत में वर्ष 2014 से एक गंभीर राजस्व विवाद चल रहा था। यह विवाद बीरबल बनाम इंद्रपाल सहित कई सदस्यों के बीच रास्ते के प्रकरण को लेकर था। लगभग 11 वर्षों तक यह समस्या न केवल पंचायत के लिए बल्कि ग्रामीण जनजीवन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनी रही। रास्ते के अभाव में ग्रामीणों को आवागमन में कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही थीं और आपसी मतभेद समय के साथ गहराते जा रहे थे लेकिन "गांव चलो अभियान" के अंतर्गत हनुमानपुरा में एक नई उम्मीद जगी। इस अभियान के दौरान राजस्व विभाग की टीम ने इस लम्बित विवाद को गंभीरता से लिया और आपसी समझाइश, निष्पक्ष राजस्व अभिलेखों की जाँच तथा जमीनी हकीकत का अवलोकन करके समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया।
*इस प्रक्रिया में विशेष भूमिका रही*
उपखंड अधिकारी मुनेश कुमारी, जिन्होंने पूरे मामले की सतत निगरानी की, प्रशासनिक मार्गदर्शन दिया और टीम को सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी सक्रियता और संवेदनशील दृष्टिकोण ने विवाद को सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाई। तहसीलदार सुरेंद्र भास्कर, जिन्होंने नेतृत्व और निर्णायक प्रशासनिक हस्तक्षेप से समाधान को संभव बनाया। भू अभिलेख निरीक्षक मंजु, जिन्होंने अभिलेखों का गहन अध्ययन कर विवादित बिंदुओं को स्पष्ट किया। पटवारी एकता स्वामी, जिन्होंने धैर्य और पारदर्शिता के साथ प्रत्येक पक्ष को समझाने का कार्य किया। कई बैठकों, संवाद और आपसी सहमति के बाद आज अंततः इस 11 साल पुराने रास्ता प्रकरण का सफलतापूर्वक समाधान कर दिया गया। रास्ता अब स्पष्ट रूप से चिन्हित और स्वीकृत हो गया है, जिससे न केवल आवागमन का मार्ग प्रशस्त हुआ बल्कि ग्रामीणों के बीच आपसी सौहार्द और विश्वास भी पुनः स्थापित हुआ। यह सफलता केवल एक रास्ता प्रकरण का समाधान नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि यदि प्रशासन और ग्रामीण मिलकर संवाद और सहयोग की भावना से कार्य करें तो वर्षों पुराने विवाद भी सुलझाए जा सकते हैं। "गांव चलो अभियान" ने यह साबित किया कि प्रशासन जब गाँव के द्वार पर पहुँचता है तो समस्याओं का समाधान न केवल सरल होता है, बल्कि पारदर्शी और स्थायी भी होता है।