जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय), जयपुर के स्वास्थवृत्त एवं योग विभाग ने 15 से 20 सितम्बर 2025 तक 6-दिवसीय सतत् चिकित्सकीय शिक्षा (CME) कार्यक्रम “स्वस्थवृत्त प्रबोधिनी” का आयोजन किया। यह कार्यक्रम स्वास्थवृत्त विषय के अध्यापकों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया था, जिसका उद्देश्य निवारक स्वास्थ्य देखभाल, आहार विज्ञान, योग तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके ज्ञान एवं कौशल को समृद्ध करना था, जिससे आयुर्वेदिक दृष्टिकोण को आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान के साथ जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम का उद्घाटन 15 सितम्बर को प्रातः पंजीकरण एवं किट वितरण के पश्चात् दोपहर 12:30 बजे ऑडिटोरियम समिति कक्ष में हुआ। इस अवसर पर संस्थान के कुलपति एवं उप कुलपति ने उपस्थित जनों को संबोधित किया और निवारक स्वास्थ्य देखभाल की महत्ता तथा राष्ट्रीय व वैश्विक स्वास्थ्य में आयुर्वेद की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
प्रथम दिवस पर डॉ.त्रुप्ती जैन ने आयुर्वेद में आद्य, प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक निवारक उपायों के साथ-साथ निद्रा एवं ब्रह्मचर्य के निवारक पक्ष पर व्याख्यान दिया। प्रो.कमलेश कुमार शर्मा ने आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा में स्वास्थ्य की अवधारणा पर व्याख्यान प्रस्तुत किया तथा प्रतिक्रियाशील, सक्रिय एवं पूर्वसक्रिय दृष्टिकोणों को समझाया और अष्टांग योग पर भी प्रकाश डाला।
द्वितीय दिवस पर डॉ.रवि कुमार ने आयुर्वेदिक आहार विज्ञान-III एवं आधुनिक पोषण विज्ञान पर व्याख्यान दिया। तत्पश्चात् प्रो.बी.के. द्विवेदी ने आयुर्वेदिक आहार विज्ञान-I तथा आयुर्वेद और आधुनिक दृष्टिकोण से व्याधिक्षमत्व विषय पर अपने विचार रखे।
तृतीय दिवस पर डॉ.सर्वेश अग्रवाल ने अध्यापन–अधिगम एवं मूल्यांकन पद्धतियों का परिचय कराया। इसके उपरान्त पथ्य–अपथ्य की अवधारणा पर संवादात्मक सत्र तथा पथ्य कल्पना पर व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित हुआ। बाद में डॉ.धर्मेश कुमार शर्मा ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय आयुष मिशन पर सत्र प्रस्तुत किए।
चतुर्थ दिवस सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं महामारी विज्ञान पर केन्द्रित रहा। डॉ.सारिन नमबीशन ससि कुमार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल तथा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में आयुष की भूमिका पर व्याख्यान दिया। इसके साथ ही डॉ.शालिनी कुमारी मिश्रा ने महामारी विज्ञान-I एवं II पर दो विस्तृत सत्र प्रस्तुत किए।
पंचम दिवस पर पर्यावरण स्वास्थ्य एवं योग पर ध्यान केन्द्रित किया गया। डॉ.शिल्पा शंकरराव वाल्कीकर ने पर्यावरण एवं स्वास्थ्य-I एवं II पर व्याख्यान दिया। तत्पश्चात् डॉ. मनीष अरोरा ने आयुर्वेदिक आहार विज्ञान-II एवं हठ योग पर सत्र प्रस्तुत किया। दिन का समापन डॉ.दुर्गावती देवी के योग एवं आयुर्वेद द्वारा तनाव प्रबंधन विषयक व्याख्यान से हुआ।
षष्ठ एवं अंतिम दिवस पर डॉ.पी.सुधाकर रेड्डी ने व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक चिकित्सा पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसके बाद डॉ.शिव कुमार हार्टी ने स्वास्थ्य सांख्यिकी तथा आयुष अनुसंधान परिचय पर अपने व्याख्यान दिए। दिन का समापन सायं 4:20 बजे आयोजित वैलेडिक्ट्री सत्र से हुआ, जिसमें सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की गई और कार्यक्रम की सफल पूर्णता की घोषणा की गई।
इन शैक्षणिक सत्रों के अतिरिक्त 16 से 20 सितम्बर तक प्रतिदिन प्रातः योगाभ्यास भी कराया गया, जिसने प्रतिभागियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया।
यह CME कार्यक्रम अकादमिक आदान–प्रदान एवं व्यावसायिक विकास का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ, जिसका उद्देश्य पारम्परिक आयुर्वेदिक ज्ञान एवं आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के सामंजस्य द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाना था।