जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर के पंचकर्म विभाग में सोमवार को 06 दिवसीय सतत् चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो.संजीव शर्मा ने की।
कुलपति प्रो.संजीव शर्मा ने कहा कि इस सीएमई का उद्देश्य आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों के पंचकर्म विषयक ज्ञान एवं कौशल को सुदृढ़ करना है, ताकि वे अपने क्लीनिकल अभ्यास में अधिक प्रभावी ढंग से रोगियों का उपचार कर सकें। पंचकर्म विभागाध्यक्ष प्रो.गोपेश मंगल ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें देशभर से आए पंचकर्म चिकित्सकों को विभिन्न रोगों में पंचकर्म चिकित्सा की जानकारी दी जाएगी। साथ ही यह भी सिखाया जाएगा कि औषधालय स्तर पर भी पंचकर्म सेटअप कैसे लगाया जा सकता है और रोगियों को किस प्रकार लाभ दिया जा सकता है। इस दौरान प्रैक्टिकल सत्रों में विशेषज्ञ तकनीकी जानकारी साझा करेंगे। सोमवार को आयोजित विभिन्न सत्रों में देशभर के पंचकर्म विशेषज्ञों ने पंचकर्म चिकित्सा की जानकारी दी।
प्रो.यूएस निगम ने “पंचकर्म की परिभाषा, प्रासंगिकता एवं वर्तमान युग में आवश्यकता” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से बाह्य स्नेह चिकित्सा, बाह्य बस्ती, शिरोधारा और पिझिचिल की चिकित्सीय उपयोगिता पर जानकारी देने के साथ प्रैक्टिकल भी करके दिखाया। डॉ.जितेन्द्र सामल ने “आभ्यंतर स्नेह” विषय पर व्याख्यान दिया। इसमें अच्छ स्नेह एवं विचरण स्नेह की मात्रा, अवधि, औषधि चयन, अनुपान एवं आहार संबंधी नियमों की जानकारी दी गई। उन्होंने स्नेहपान की मात्रा का मानकीकरण, कोष्ठ परीक्षा, संकेत एवं प्रतिषेध पर भी विस्तार से चर्चा की। 06 दिवसीय सीएमई कार्यक्रम के दौरान देशभर से आए पंचकर्म विशेषज्ञ चिकित्सक विभिन्न तकनीकी पहलुओं और रोग उपचार में पंचकर्म की उपयोगिता पर जानकारी एवं प्रशिक्षण देंगे।