गौशालाओं का संचालन या डेयरी संचालन

AYUSH ANTIMA
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बेसहारा गौवंश को लेकर आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने अपने लेखों में बार बार झुन्झुनू जिले की गौशालाओं को लेकर जनता की अदालत व सरकार के संज्ञान में लाने की भरसक कोशिश की है कि बेसहारा गौवंश को लेकर यह गौशालायें संवेदनशील नहीं है क्योंकि गौशालाओं की आड़ में डेयरी का संचालन हो रहा है। आयुष अंतिमा के लेखों पर सरकार ने मोहर लगा दी है कि जिले में 14 गौशालाओं ने अपनी कार्यकारिणी का पुनर्गठन समय रहते नहीं किया, जिसके कारण सरकार ने उन गौशालाओं को मिलने वाले अनुदान पर रोक लगा दी है। इन गौशालाओं में स्थानीय पिलानी की गौशाला का नाम भी है, जो काफी चौंकाने वाला है। विदित हो गौशालाओं का संचालन करने में भामाशाहों का आर्थिक सहयोग भी प्रमुख भूमिका अदा करता है। जिन गौशालाओं पर एक ही परिवार का एकाधिकार है, उनको गौशाला की संज्ञा देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता, इन गौशालाओं को डेयरी कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। सार्वजनिक रूप से देखा जाए तो गांव या शहर के प्रत्येक व्यक्ति का गौशाला संचालन में रामसेतु के निर्माण में योगदान गिलहरी के योगदान जैसा है। इसको निजी संपत्ति बनाना, किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। यदि गौशाला संचालक इसको निजी संपत्ति समझते हैं तो गौशाला की जगह डेयरी लिखवा दे तो कोई भी आम आदमी प्रश्न नहीं खड़े करेगा। यदि गौशाला का संचालन हो रहा है तो प्रत्येक नागरिक का अधिकार है कि उसमे जो कथित अनियमितता है तो उसके बारे में पूछने का अधिकार है। गौवंश पर किसी एक परिवार का एकाधिकार नहीं हो सकता क्योंकि यह हर सनातनी की पूज्या है और सनातन धर्म में इसे माता का दर्जा है तो हर बेटे का मौलिक अधिकार है कि वह अपनी माता स्वरुप गौवंश की दुर्दशा देखकर स्थानीय गौशाला प्रबंधक से सवाल पूछे कि आखिर बेसहारा गौवंश को आसियाना देने से वंचित क्यों कर रखा है। गौशालाओं का क्या संविधान हैं और कार्यकारिणी के पुनर्गठन व चुनावों में किस व्यक्ति को पदाधिकारी चुनने का अधिकार है। कहीं न कहीं इन गौशालाओं का संचालन संदेह के घेरे मे है। यदि इन गौशालाओं की बात करें तो वर्तमान कार्यकारिणी की क्या मजबूरी है कि नई कार्यकारिणी को लेकर आखिर चुनाव क्यों नहीं हुए। वे कौन से साधारण या आजीवन सदस्य हैं, जिनको कार्यकारिणी चुनने का अधिकार है ? साधारण सदस्य या आजीवन सदस्य बनने की प्रकिया में पारदर्शिता आखिर क्यों नहीं है ? यह ज्वलंत प्रश्न आखिर गोशाला संचालन करने वाली कार्यकारिणी को संदेह के घेरे में खड़ा कर रहे हैं।

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