झुंझुनु (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): अभी तक हमने मनुष्य को ही मैट पर सोते और बैठते देखा होगा लेकिन अब झुंझुनूं की श्री गोपाल गौशाला में रहने वाली गौमाता भी गर्म गद्दों (मैट) पर सो पाएंगी, झुंझुनूं की गौशाला में भी नवाचार के क्रम में। यह झुंझुनूं जिले की पहली गौशाला है, जहां गायों के बैठने के लिए गद्दों का प्रयोग किया जा रहा है। जानकारी देते हुए गौशाला कार्यकारिणी अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया एवं मंत्री नेमी अग्रवाल ने बताया कि मुंबई प्रवासी सुशील रामस्वरूप गाडिया ने झुंझुनू प्रवास के दौरान कुछ समय पूर्व गोशाला में आकर गोसेवा की और गौमाता के लिए काउ मैट मंगवाए जाने की स्वीकृति दी, जिस क्रम में प्रथम चरण में एक बार 10 काउ मैट मंगवाए गए हैं। इसके पश्चात् लगभग 200 गौ माता के लिए धीरे धीरे करके ये काउ मैट और मंगवाए जाएंगे। यह गौ माता को सर्दी और गर्मी में राहत देगी। इस पर बैठने एवं सोने से गौ माता को बेहद आराम मिलेगा। उन्होंने बताया कि काउ मैट गौवंश को कई रोगों से बचाता है। इस मैट से गौवंश के घुटने छिलने की समस्या से भी मुक्ति मिलती है। गौवंश के थन को सुरक्षित रखने में भी मैट काफी मददगार होती है। इससे गौवंश के दूध उत्पादन की क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है। यह गौवंश के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होती है। गोशाला परिसर में नवनिर्मित गोबर बायो गैस प्लांट श्रीमती मंजू सुरेश खण्डेलिया मुंबई के सौजन्य से शीघ्र शुरू होने जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। बड़ौदा की कंपनी से एमओयू किया गया है, जिनके द्वारा मशीनरी एवं आवश्यक सामान भी गोशाला पहुंच गया है, जल्द ही गैस प्लांट शुरू हो जाएगा। विदित है कि वर्तमान कार्यकारिणी ने हाल फिलहाल इस वर्ष में कई भामाशाहो के सहयोग से गौ-आवासो का निर्माण करवाया। गुजरात भावनगर से गिर गाय एवं बीकानेर- लूणकरणसर से राठी नस्ल की गायें लाकर उनका लालन पालन गोशाला में किया जा रहा है।
झुंझुनूं की श्री गोपाल गोशाला नवाचारों के लिये जानी जाती हैं। यहां गौ माता की सेवा पिछले 125 वर्षों से होती रही है। यह गौशाला स्थानीय एवं प्रवासियों के सहयोग से संचालित है। दिन प्रतिदिन लोगो का गो माता की सेवा में रुझान बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि गौशाला दिन प्रतिदिन सुंदर से सुन्दर होती जा रही है।