स्वच्छता केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक भी होनी चाहिए: आर्यिका ज्ञानश्री

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद सैनी): सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में शहर के सभी जिनालयों एवं विज्ञातीर्थ पर उत्तम शौच धर्म की पूजा एवं विधान का आयोजन किया गया। विज्ञातीर्थ कार्याध्यक्ष सुनील भाणजा ने बताया कि श्री दिगंबर जैन अग्रवाल मंदिर एवं सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ में प्रात:काल सोधर्म इंद्र विष्णु कुमार, राहुल कुमार व ग्रंथ कुमार बोहरा ने भगवान शांतिनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की। उसके पश्चात इन्द्र ताराचन्द अनिता गोयल रामनगर ने दसलक्षण मंडल विधान 17 अर्घ्य चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान सांयकाल में महाआरती, शास्त्र सभा एवं 1 मिनट प्रतियोगिता सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इसी प्रकार जिनोदय युवा संघ के युवाओं ने महाआरती की एवं भव्य शोभायात्रा निकाली। विज्ञातीर्थ पर आर्यिका ज्ञानश्री माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक भी होनी चाहिए। दसलक्षण पर्व का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म इसी का संदेश देता है। शरीर वाणी और मन में फैली मलीनताओं को दूर करना ही इसका पालन है। हमारी इंद्रिया आंख, कान, नाक और त्वचा अनेक इच्छाओं को जन्म देती है, आंखें किसी वस्तु को देखकर लोभ करती है, कान बातें सुनकर लालच जगाते हैं, जीभ स्वाद के मुंह में पड़ती है, यही सब आंतरिक अशुद्ध का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य इन आसक्तियों का त्याग करता है, तभी जीवन सच्ची सुंदरता और निर्मलता से खिलता है। धर्म आत्मा को हल्का पवित्र और परमात्मा के समीप ले जाता है। इस दौरान महावीर पराणा, अरविंद ककोड, महेश मोटूका, हितेश छाबडा, नितिन चंवरिया, चिंटू टोंक, नरेश बड़ागांव, शैलेंद्र संघी, मोनू पाटनी, जयकुमार गिंदोडी, योगेंद्र सिंघल, मनीष जैन, हर्षित संघी, विनोद वनस्थली, ललित सिरस, नीरज कठमाणा व पारस सिरस सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।

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