हमारे सभ्य समाज में मां एक ऐसा रिश्ता है, जिसके नाम लेने से ही मानसिक संतुष्टि के अलावा एक अद्भुत मिठास की अनुभूति होती है। हमारे सनातन धर्म की विशालता है कि हर सनातनी गौवंश को भी मां का दर्जा देता है। मां एक ऐसा अहसास है कि जब भी कोई कष्ट आता है तो मां की ही पुकार मुंह से निकलती है लेकिन दुर्भाग्य कि भारतीय राजनीति के नेताओ ने चुनाव जीतने की लालसा में इस पवित्र रिश्ते को भी नहीं छोड़ा।
बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव व लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी की बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के दौरान देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माताजी को लेकर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। भारतीय राजनीति में भाषाई सुचिता में गिरावट की पराकाष्ठा ही कहा जायेगा कि दिवंगत पुण्य आत्मा के प्रति असम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। चुनावों में हार जीत सिक्के के दो पहलू होते हैं, प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सत्ता प्राप्ति का जरिया केवल और केवल जनता का आशीर्वाद होता है और आमजन का भरपूर आशीर्वाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिला हुआ है और अपमान जनक शब्द उसी हार की बौखलाहट है, जो बिहार चुनावों में विपक्ष को दिखाई दे रही है। नारी सम्मान व नारी सशक्तिकरण के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पोषक बनकर उभरे हैं और यही विपक्ष को पच नहीं रहा है। दूसरी तरफ प्रतिपक्ष नेता के पद की गरिमा को गिराने में उनके आचरण को किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष की रैली में नारी शक्ति का घोर अपमान उनकी संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है।