जहां सुई का काम हो वहां पर तलवार काम नहीं आती है: ज्ञानश्री माताजी

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद सैनी): सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में सहस्त्रकूट विज्ञा तीर्थ पर गणनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी की शिष्या आर्यिका ज्ञानश्री माताजी व ज्ञायकश्री माताजी के सानिध्य में विज्ञातीर्थ पर अतिशयकारी शांतिनाथ भगवान के 108 कलशों से अभिषेक किया गया। चार्तुमास कमेटी के कार्याध्यक्ष सुनील भाणजा ने बताया कि प्रात:काल में इन्द्र द्वारा क्षीर सागर का जल से मूलनायक शांतिनाथ भगवान के 108 कलशों से अभिषेक किया एवं शांतिधारा की गई। उसके पश्चात माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में कुछ बड़ा मिल जाये तो छोटे को मत भूलना चाहिए क्योंकि जहां सुई का काम हो, वहां तलवार काम नहीं आती है। माताजी ने बताया कि दसलक्षण महापर्व पर विज्ञातीर्थ पर भक्तों द्वारा दस दिनों तक दस धर्म की पूजा-अर्चना भक्ति पूर्वक की जाएगी। उन्होंने बताया कि विज्ञातीर्थ पर दसलक्षण महापर्व बड़ी धूमधाम से गाजे बाजे के साथ मनाया जाएगा एवं दसलक्षण महापर्व के अंतर्गत दसलक्षण महामंडल विधान का आयोजन भी किया जाएगा। चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष विष्णु बोहरा ने बताया कि विज्ञातीर्थ पर प्रतिदिन निवाई सहित टोंक, चाकसू, पदमपुरा, कोटा, जयपुर, सांगानेर सहित कई शहरों से भगवान शांतिनाथ के अभिषेक करने के लिए आते हैं। उन्होंने बताया गुरूवार को विष्णु बोहरा, सुनिल भाणजा, महेंद्र चंवरिया, मनोज पाटनी, महेश मोटूका, निशु झिलाय, किशु पदमपुरा, डब्बू संघी, लवेश पाटनी, महावीर मित्तल, हितेश छाबड़ा व बंटी झांझरी सहित सैकड़ो श्रद्धालु मौजूद थे।

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