पत्रकारिता के उच्चतम आयाम स्थापित करता आयुष अंतिमा

AYUSH ANTIMA
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आज के इस प्रतिस्पर्धा की दौड़ में जहां बड़े बड़े मिडिया हाउस अपनी धाक जमाने को आतुर है। इसमें सबसे पहले सबसे तेज की धारणा को दरकिनार करते हुए जयपुर से प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र आयुष अंतिमा पाठकों के अतुलनीय प्रेम से 20 अगस्त 2025 को पांचवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। आयुष अंतिमा की इन चार साल की यात्रा में प्रबुद्ध पाठकों का अपार स्नेह आयुष अंतिमा को मिला है। खासकर झुन्झुनू के पाठको के लिये आयुष अंतिमा के समाचार विश्वास का प्रतीक है कि झुन्झुनू संस्करण का पेज प्रत्येक अंक में प्रकाशित होता है। पत्रकारिता का वह दौर भी देखा था, जब लोग सुबह सुबह अखबार का इंतजार करते थे। चौपालो, चाय की दुकान, नुक्कड़ पर उन अखबारों में प्रकाशित खबरों का विश्लेषण होता था व इस बात पर जोर दिया जाता था कि यह खबर आज के अखबार में छपी है। इलैक्ट्रोनिक मीडिया ने पैर पसारे, सबसे तेज सबसे पहले की प्रवृत्ति को लेकर पत्रकारिता होने लगी लेकिन प्रिन्ट मीडिया पर आवाम का आज भी विश्वास कायम है। पत्रकारिता एक तरह का वह आईना है, जो समाज को सच्चाई से रूबरू करवाता है। पत्रकारिता सरकार व देश के आवाम के बीच सेतु का काम करती है। सरकार की ग़लत योजनाओं का विरोध व जन कल्याणकारी योजनाओं को जन जन तक पहुंचाना पत्रकारिता की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सियासत की ड्योढ़ी पर यदि कलम नाक रगड़े तो वह पत्रकारिता के साथ अन्याय है। पत्रकारिता लोकतंत्र का वह स्तम्भ है, जिस पर हमारा विश्व प्रसिद्ध लोकतंत्र होने का गर्व है। 
आयुष अंतिमा ने सामाजिक सरोकार की खबरों को प्राथमिकता देने के साथ ही तथ्य परक समाचारों को महत्व दिया है। अपने स्थायी लेख के जरिये वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को उजागर करने के साथ ही सामाजिक सरोकार को लेकर स्थायी लेख लिखा जाता है। आयुष अंतिमा ने राजस्थान के पत्रकारिता के भीष्म पितामह पंडित झाबरमल शर्मा को अपना आदर्श माना है, जो पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखते हुए अंग्रेजी हुकूमत से टकरा गये थे। जुर्माना न भरने के साथ ही कलम के धनी पंडित झाबरमल शर्मा ने अपने सिध्दांतों से समझौता नहीं किया। आयुष अंतिमा ने भी उन्हीं सिध्दांतों का अनुसरण किया है। किसी भी राजनेता की सार्थक आलोचना होनी चाहिए न कि किसी से प्रभावित होकर किसी राजनेता की आलोचना की जाए। आयुष अंतिमा ने सार्थक आलोचना के मध्यनजर अपनी खबरों व लेखों में राजनेताओं की कमियों व खूबियों को उजागर किया है। यह आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) के प्रबुद्ध पाठकों का स्नेह है कि चार साल की यात्रा पूरी की है। खासकर शेखावाटी के पाठको ने झुन्झुनू संस्करण को असीम स्नेह दिया है। आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) सभी पाठकों को विश्वास दिलाता है कि पत्रकारिता के मूल्यों के साथ कभी समझौता नहीं होगा व कलम बिना किसी भेदभाव के अनवरत चलती रहेगी। आप लोगों का स्नेह, प्रेम व विश्वास ही आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) की ताकत है। आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) परिवार आपसे भविष्य में भी इसी स्नेह व प्रेम की आशा रखता है।

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