जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राष्ट्रीय अभिभावक दिवस के उपलक्ष्य में संयुक्त अभिभावक संघ के तत्वाधान में अभिभावकों ने रविवार को शिक्षा संकुल के बाहर शरबत वितरण कर श्रमदान किया। इस अवसर पर प्रातः 9 बजे संघ अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल, महामंत्री संजय गोयल, कोषाध्यक्ष सर्वेश मिश्रा, विकास मुद्दगल, हेमराज अग्रवाल, संदीप जैन छाबड़ा इत्यादि ने विद्या की देवी मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रवज्जलन कर कार्यक्रम की शुरुवात की। इस अवसर पर कांग्रेस नेता संजय बापना, किसान नेता रामपाल जाट, पशुराम सेना अध्यक्ष एडवोकेट अनिल चतुर्वेदी, टोंक रोड़ अग्रवाल समाज समिति अध्यक्ष मुकेश गुप्ता, महामंत्री केके सिंघल, बजाज नगर थाना इंचार्ज पूनम चौधरी इत्यादि ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर शरबत वितरण किया और सभी को राष्ट्रीय अभिभावक दिवस की शुभकामनाएं आदान प्रदान की।
प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि प्रातः 9 बजे शरबत वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान सैकड़ों राहगीरों ने पूछा कि अभिभावक दिवस भी कोई पर्व होता है क्या, तब उन्हें जानकारी दी गई कि अभिभावक दिवस पर्व तो होता है कि वर्तमान की शिक्षा व्यवस्था और सिस्टम ने अभिभावकों को अभिभावक ना समझकर एक तरह से एटीएम बनाया हुआ है, जिसके चलते अभिभावकों को ना जागरूक किया जा रहा है और ना ही होने दिया जा रहा है। इसलिए पहली बार अभिभावक दिवस पर अभिभावकों को एकजुट जागरूक करने के लिये यह आयोजन किया गया। रविवार को शिक्षा संकुल के बाहर ही आरटीई में दाखिला नहीं होने से पीड़ित अभिभावकों के साथ भी मीटिंग की गई, जिसमें 29 को राजस्थान हाईकोर्ट में होने का इंतजार करने के बाद आगामी योजना पर विचार विमर्श करने का निर्णय लिया गया। इसके उपरांत दोपहर 12.30 बजे शिक्षा संकुल के मुख्य द्वार पर झालावाड़ स्कूल हादसे के शिकार हुए विद्यार्थियों और कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कोचिंग संचालकों से तंग आकर आत्महत्या की। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि "निजी स्कूल हो या सरकारी स्कूल या फिर कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्रों को सुरक्षा की गारंटी राज्य सरकार को देनी चाहिए। झालावाड़ के हादसे के बाद प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अभिभावक अब छात्रों के प्रति चिंतित हो खड़े हुए है क्योंकि सरकारी स्कूलों में पहले शिक्षा बचानी पड़ती थी किंतु अब बच्चों को बचाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा। किसान नेता रामपाल जाट ने कहा कि झालावाड़ के सरकारी स्कूल का हादसा बेहद दुखद था, राज्य सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहिए और खासकर विद्यार्थियों की सुरक्षा तय करनी चाहिए। परशुराम सेना अध्यक्ष अनिल चतुर्वेदी ने कहा कि बच्चे देश, समाज और परिवार का भविष्य होते है, ऐसी स्थिति में जिम्मेदार लोगों की अनदेखी और अव्यवस्थाओं से उनका जीवन नष्ट हो जाए तो यह देश, समाज परिवार के लिए बेहद दुखद संदेश है। कांग्रेस नेता संजय बापना ने कहा कि झालावाड़ की घटना सरकार और प्रशासन की नाकामियों का प्रमाण है, अगर समय रहते वहां के शिक्षकों की बात जिम्मेदार लोग मान लेते तो विद्यार्थियों का जीवन बच सकता था, अब भी सरकार चेत नहीं रही है। प्रदेश में ऐसे हजारों स्कूल है, जो जर्जर है किंतु अभी तक उनको दुरुस्त करने के आदेश नहीं दिए जा रहे है, जो साबित करता है सरकार संवेदनशील नहीं है।