सरकार अफसर चला रहे हैं या मंत्री

AYUSH ANTIMA
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डबल इंजन सरकार का गठन होते ही राजस्थान के आवाम को लगा कि सरकार जनहित को सर्वोपरि रखने के साथ ही विकास के उच्चतम आयाम स्थापित करेगी। समय बीतने के साथ ही आमजन का यह सपना काफूर हो गया। राजस्थान का आवाम भ्रमित है कि सरकार को कौन चला रहा है। भाजपा की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे व पूर्व मुख्यमंत्री व काबिना मंत्री डॉ.किरोड़ी लाल मीणा भी अफ़सरशाही के हावी होने के आरोप लगाते रहे हैं। शेखावाटी का झुंझुनूं जिला जिसमें पीआरओ आफिस को लेकर अफसर व जिले के पत्रकार आमने सामने हैं। पत्रकारिता हमारे लोकतंत्र का वह स्तम्भ है, जो आमजन व सरकार के बीच सेतु का काम करता है। भाजपा कांग्रेस शासन में लगी इमरजेंसी को लेकर आज तक कांग्रेस पर हमलावर है कि उस समय पत्रकारिता को कुचलने का काम कांग्रेस ने किया था। शायद उसी इतिहास को दोहराते हुए झुन्झुनू स्थित जन सम्पर्क कार्यालय को कागजों में ही रखने की कवायद हो रही है। इस मामले के अहम किरदार वही अफ़सरशाही है, जिसका उपर उल्लेख किया जा चुका है। प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत के आदेशो की अवहेलना आखिर किसके इशारे पर हो रही है कि एक अफसर की हठधर्मिता के चलते जिले के पत्रकारों को सड़क पर आना पड़ रहा है। विदित हो झुन्झुनू में मंत्रियों के ताबड़तोड़ दौरो में अफसरो के साथ जिला कलेक्टर की उपस्थिति में बैठकें होती है और मंत्री महोदय अफसरों को सरकार की जन कल्याणकारी नितियों को जिले के अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचाने के आदेशो की खबरें देखने को मिलती है। पीआरओ आफिस प्रकरण को लेकर जिस प्रकार जिले के पत्रकार आक्रोशित हैं, उसको लेकर भी प्रभारी मंत्री के आदेशो की परिपालना नहीं हो रही है तो इस तरह की बैठकों का क्या औचित्य है। जब अफसरशाही सरकार की बात को अनसुनी कर रही है तो इस तरह की बैठकें कर आवाम को बरगलाने से बाज आना चाहिये। इस प्रकरण को लेकर पूरे जिले में उबाल है। अनगिनत संगठनों ने इसका विरोध किया है लेकिन स्थानीय प्रशासन कुंभकरणी नींद में सोया हुआ है। आखिर अफसरों को शायद यह आभास है कि नेता या मंत्री तो अस्थायी होते हैं, हमारी नौकरी तो स्थायी है तभी मंत्री की बात को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देते हैं। रोजाना मंत्रियों व विधायकों की खबरें सोशल मिडिया पर दिखाई देती है कि जन सुनवाई की व आमजन की समस्या को लेकर अधिकारियों को तुरंत निवारण का आदेश दिया लेकिन यह कटु सत्य है, जो झुंझुनूं के प्रकरण को लेकर हो रहा है कि अधिकारी कोई सुनवाई नहीं करते। जिला कलैक्टर की बैठक में यह भी सुनने को मिलता है कि झुंझुनूं में जल भराव की समस्या को लेकर नगर परिषद को निर्देश दिए लेकिन क्या इस समस्या का निराकरण हुआ। जैसा कि रीको, पुलिस लाइन से पीरूसिंह सर्किल, गांधी चौक से पंच देव मंदिर व अग्रसेन सर्किल बगड़ रोड के हालात बता रहे है कि नगर परिषद के अधिकारी उनकी कितनी सुनवाई करते है। अफसरो की दबंगई का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बांसवाड़ा की गढ़ी विधानसभा के विधायक कैलाश मीणा पुलिस अफसर के पैर छूने का विडियो वायरल हो रहा है। विधायक का एक मामले में पुलिस की कार्रवाई न करने को लेकर पुलिस अधिकारी के पैर छूने के बाद धरने पर बैठ गये। एक ताजा उदाहरण यह भी देखने को मिला कि जयपुर के एक विधायक पुलिस थाने में थानेदार की कुर्सी पर बैठकर थाने का संचालन करते नजर आ रहे थे। उपरोक्त तथ्यों से यह साबित होता है कि सरकार पर अफसरशाही हावी है।

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