भूजल संरक्षण विधेयक को लेकर सरकार की किरकिरी

AYUSH ANTIMA
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राजस्थान सरकार के जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने भूजल संरक्षण एवं प्रबंध प्राधिकरण विधेयक को राजस्थान विधानसभा के पटल पर रखते ही वापिस ले लिया। चौ़धरी ने इसको लेकर कहा कि विपक्ष की आपत्तियों के कारण विधेयक वापिस लेना पड़ा। शायद राजस्थान विधानसभा के इतिहास में पहला अवसर रहा होगा कि प्रवर समिति से आया विधेयक दुबारा प्रवर समिति को लौटा दिया गया। विधेयक को दुबारा प्रवर समिति को भेजना भजन लाल शर्मा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रवर समिति के मंथन के बाद विधयेक आना और फिर वापिस प्रवर समिति को भेजने का मतलब है कि विधेयक को लेकर सही होमवर्क नहीं किया गया या फिर विपक्ष की आपत्तियों को दरकिनार किया गया।‌ इस बिल पर बहस में विपक्ष ने विधयेक को लेकर आरोप लगाया कि डबल इंजन सरकार पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी पहला लगाना चाहती है।‌ इस विधेयक के लागू होने से अफसर शाही हावी होगी, जिससे आमजन को भारी मुश्किलें होगी। अब यदि इस विधेयक की बात करें तो सरकार ने आशंका व्यक्त की थी कि राजस्थान में भूजल का संकट गहराया हुआ है।‌ इसको लेकर भूजल निकासी के लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है। इस विधेयक के अनुसार जमीन से पानी निकालने के लिए सरकार शुल्क वसूलेगी। यदि घरों में जलापूर्ति के लिए ट्यूबवेल व हैंडपंप लगाते हैं तो सरकार से अनुमति लेनी होगी। यदि इसका कोई व्यक्ति उल्लंघन करता है तो 6 माह की कैद व एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान रखा गया। एक तरफ सरकार इआरसीपी परियोजना के तहत राजस्थान मे जल संकट नहीं मान रही और दूसरी तरफ विधयेक के जरिए जल का घोर संकट बताया जा रहा है।‌ यदि इस विधेयक के संदर्भ में पिलानी विधानसभा खासकर गृह नगर पिलानी की बात करें तो यह विधेयक पिलानी विधानसभा के जनमानस के गले में फांसी के फंदे जैसा है। जल का घोर संकट है व जनता पीने के पानी को लेकर त्राहि त्राहि कर रही है और आगामी गर्मी के मौसम में स्थित और भी भयावह होगी। ऐसी स्थिति में सरकार पानी उपलब्ध नहीं करवा रही और यदि जनता खुद ट्यूबवेल का प्रबंध करें तो उस पर पहरा लगा दिया गया। शेखावाटी की जनता के हाथ में यमुना जल का झुनझुना थमा दिया गया है और स्थानीय नेता व भाजपा के विधायक सोशल मिडिया पर डबल इंजन सरकार को महिमा मंडित कर रहे हैं। एक तरफ देश विश्व गुरू बनने के आउटर सिग्नल पर खड़ा है तथा दूसरी तरफ आजादी के 70 साल बाद भी जनमानस पानी के लिए तरह रहा है। जल है तो कल है व हर नल में जल का आलाप करने वाली सरकार पानी पर जजिया कर की तरह कर लगाकर जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। यह विधेयक तो वापिस हो गया, इसके लिए पिलानी विधानसभा का आवाम सरकार को धन्यवाद ज्ञापित करता है लेकिन इसके साथ ही डबल इंजन सरकार पिलानी के आवाम के हितों का संरक्षण करते हुए तत्कालिक पानी की व्यवस्था को लेकर कुंभाराम लिफ्ट परियोजना को साकार रूप देने की दिशा में सार्थक प्रयास करें ।

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