शेखावाटी के आवाम के लिए पानी एक मूलभूत आवश्यकता होने के साथ ही दशकों से चला आ रहा लंबा संघर्ष है। इसको लेकर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के दिल्ली दौरे से यमुना जल परियोजना को लेकर एमओए की बैठक एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि शेखावाटी के लोगों की वह आशा है, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल से बैठक करने के बाद मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने मिडिया से रूबरू होते हुए बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की क्रियान्विति में आने वाली बाधाओं को दूर कर लिया गया है। एमओए को लेकर उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में होगा। विदित हो हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान को यमुना का पानी मिलने की योजना 1994 में तत्कालीन राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत और केन्द्र में कांग्रेस नीत सरकार के प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव थै तब बनी थी। वर्ष 2007 में वसुंधरा राजे ने मुख्यमंत्री रहते हुए इस योजना की लागत करीब 20 लाख करोड़ आंकी थी तत्पश्चात अशोक गहलोत ने 31 हजार करोड़ रूपये का प्रस्ताव केंद्र सरकार की अनुशंसा के लिए भेजा कि पानी नहर से लाया जाए लेकिन मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के कार्यकाल में पानी लाने का माध्यम पाईप लाईन को लेकर सहमति बनी है। यदि इस बैठक को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बयान पर नजर डालें तो उन्होंने कहा है कि बरसात के दिनों मे जो यमुना का पानी बहकर चला जाता है, उसमें से ही राजस्थान को दिया जायेगा। यानी हरियाणा अपने हिस्से में से राजस्थान को पानी नहीं देगा। अब इस परियोजना की निर्भरता तो इन्द्र भगवान पर हो गई कि यमुना कब उफान पर आये और जो पानी बहकर चला जाता है, उसको राजस्थान को दिया जाए। देखा जाए तो यमुना जल का पानी द्वारा शेखावाटी की प्यास बुझे इस मुद्दे पर पिछले 6 दशकों से राजनीति चल रही है। झुंझुनूं जिले के कद्दावर नेता ने इस मुद्दे का दशकों तक दोहन किया और वोट बटोरते रहे। अब जब केन्द्र व राज्यों में डबल इंजन सरकार आई है तो शेखावाटी के लोगों के मन में आस जगी है कि पीने का पानी निश्चित रूप से उपलब्ध होगा। तत्कालीन सांसद संतोष अहलावत के प्रयासों को भी इस मुद्दे को लेकर नकारा नहीं जा सकता है। अब सवाल यह उठता है कि जो पानी बहकर बेकार चला जाता है, उसको रोकने के लिए बांध कब और कहां बनेंगे यह असमंजस दिखाई देता है। इस बैठक को लेकर शेखावाटी के लोगो में बहुत उत्सुकता है कि जल्द ही दोनो राज्यों में एमओए हो और यह परियोजना जल्द ही कागजों से निकल कर धरातल पर दिखाई दे। डबल इंजन सरकार का गठन होते ही दोनो मुख्यमंत्रियों की बैठक में दावा किया गया था कि चिर परिचित यमुना जल समझौता हो चुका है और जल्द ही शेखावाटी का आवाम पीने के पानी की समस्या से निजात पायेगा और शेखावाटी के खेत लहलहाने लगेंगे। जब भी मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का शेखावाटी अंचल का दौरा रहा, उन्होंने अपने भाषणों में यमुना जल समझोतै का जरूर उल्लेख किया। तत्पश्चात स्थानीय नेताओं ने तो यहां तक कहा कि इस परियोजना को लेकर टेंडर भी हो चुके हैं लेकिन शेखावाटी का आवाम नेताओं के वादों को मृग मरीचिका की तरह देख रहा है। यह तो समय की गर्त में छिपा प्रश्न है कि इस पीढ़ी को क्या यमुना जल नसीब होगा।
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