हे परमात्मा नमन है आपको, कल्पना करती हूं कभी-कभी
की अगर आपसे मेरा साक्षात्कार हो तो मैं आपसे मेरे मन में पांच सवाल हैं, जिनको मैं बातों ही बातों में आपके साथ करना चाहुंगी। आप और मैं जवाब-सवाल भी मिलकर करेंगे क्योंकि दुनिया में सिर्फ आप ही वो शक्ति और ईश्वर हैं।
*सवाल इस प्रकार है*
* जन्म: आपने अपनी इस खुबसूरत दुनिया में मुझे मनुष्य के रूप में ही जन्म क्यों दिया ?
उत्तर: बहुत सुंदर और गहरा सवाल है वत्स तुम्हारा। कई योनियों के बाद बहुत जन्मों तक अच्छे कर्म करने के बाद मनुष्य का जन्म मिलता है कि जब वो दुबारा जग में जन्म ले तो उसमें रहते हुए मुझे पहचाने और मुझमें मिल जाए।
* बात: प्रभु बहुत मन करता है आप मुझसे बात करो, आप बात क्यों नही करते ?
उत्तर: बच्चे मैं तो हर वक्त बात करता हूं लेकिन तुम सुनते कहां हो।
* असमानता: प्रभु आपकी इस दुनिया में हम मनुष्यों में इतनी असमानता क्यों है, कोई गरीब अमीर कोई बीमार लाचार किसी के पास बेशुमार खाना कोई भूखा सोए ऐसा क्यों है ?
उत्तर: तुम सब मेरे बच्चे हो लेकिन पिछले जन्मों के बुरे कर्मों का फल तो भुगतना ही पड़ता है, चाहे इस जन्म में हमने कोई बुरा कर्म ना करा हो।
* डर: प्रभु कभी-कभी मैं बहुत डर जाती हूं पता नहीं क्यों ?
उत्तर: अगर तुम मुझ में पूर्ण रूप से दिल से आस्था रखती हो तो डरने का सवाल ही नहीं लेकिन तुम्हारा डर यह इशारा करता है कि तुम मुझ में पूर्ण रूप से आस्था नहीं रखती।
* ध्यान: ध्यान भटकता ही रहता है, क्यों नहीं टिकता आप में ?
उत्तर: ये दुनिया एक मोह माया का जाल है, जिससे तुम बुरी तरह से प्रभावित हो। तुम्हें
अपनी बुद्धि और विवेक से निर्णय लेना होगा और इसका मोह कम करोगे तभी ध्यान भटकना कम होगा और मुझसे जुड़ पाओगे।