प्राकृतिक खेती पर जिला स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (मुकेश रामावत): राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त निर्देशों की अनुपालना में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के क्रम में प्राकृतिक खेती पर जिला स्तरीय कार्यशाला कार्यक्रम का आयोजन कृषि भवन आत्मा सभागार में गुरुवार को हुआ। प्राकृतिक खेती कार्यशाला कार्यक्रम के अवसर पर श्याम पंचारिया ने कहा कि किसान प्राकृतिक खेती के महत्व को समझें, इसकी शुरुआत 1 एकड़ में प्राकृतिक खेती से करें तभी प्राकृतिक खेती-जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। श्रीमती सुमन छाजेड़ ने कहा प्राकृतिक खेती स्वस्थ मृदा-समृद्ध किसान की परिकल्पना पर आधारित है। अभी हाल ही में प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के रूप में लिया गया है। 
भंवर लाल जांगिड़ ने कहा कि प्राकृतिक खेती रसायन मुक्त खेती है, जिसमें किसान अपने खेत पर उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग कर, देशी पशु से प्राप्त गोबर-गोमूत्र की सहायता से प्राकृतिक खेती करता है। प्राकृतिक खेती में किसी भी स्तर पर रसायन का उपयोग नहीं किया जाता है। 
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने पावर पाइंट प्रजन्टेशन द्वारा प्राकृतिक खेती के बारे में बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के क्रम में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत राज्य स्तर पर कुल 1800 क्लस्टर का आवंटन है, वहीं जिला बीकानेर को 70 क्लस्टर में 8750 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ते हुए प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल को बढ़ावा देने हेतु लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल सके। 60 कलस्टर में प्रति कलस्टर 2 कृषि सखी (सीआरपी) का चयन स्थानीय स्तर पर गांव में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के क्रम में किया गया है। प्राकृतिक खेती कार्यक्रम के तहत 6 बायो इनपुट रिसोर्स केंद्र का चयन किया गया है। प्रति केंद्र एक लाख रुपए की राशि 50-50 हजार की दो किश्तों में स्वीकृत की जा रही है। चन्द्र मोहन जोशी ने कहा कि प्राकृतिक खेती पूर्णत: स्थानीय जैव विविधता को सुरक्षित रखते हुए जीरो बजट पर आधारित खेती है। कार्यशाला के समन्वयक दीपक यादव व सह समन्वयक मांगीलाल विश्नोई ने भी किसानों को सम्बोधित किया और कहा कि प्राकृतिक खेती के तहत किसान भाई स्वयं के खेत पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए जीवामृत, बीजामृत, पंचगव्य, ब्रह्मास्त्र, अग्नाशास्त्र, वर्मीवास का उपयोग करते हुए प्राकृतिक खेती कर अधिकाधिक क्षेत्रफल में प्राकृतिक खेती कर सकते है। प्राकृतिक खेती से मृदा स्वास्थ्य सुधरता है एवं उर्वरकता स्तर बढ़ने के साथ साथ मिट्टी में लाभदायक जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि होती है। प्राकृतिक खेती कार्यशाला को सत्य प्रकाश आचार्य, पूर्व महापौर नारायण चोपड़ा, धर्मेंद्र सोलंकी, श्रीमती सुनीता हटीला, श्याम सिंह हाड़ला, महावीर सिंह चारण, दिलीप सिंह राजपुरोहित ने भी संबोधित किया व प्राकृतिक खेती पर किसानों से विस्तृत चर्चा की। संयुक्त निदेशक कृषि मदन लाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की व आगुंतक अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कृषि अधिकारी रामनिवास गोदारा ने अवगत करवाया कि चयनित कृषि सखी को प्रति माह 5000 रुपए मानदेय विभाग द्वारा दिया जावेगा तथा मोबाइल हेतु एकमुश्त 4000 रुपए की राशि भी स्वीकृत की जाएगी। कार्यशाला में कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक गण ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न बिंदुओं पर किसानों से विस्तृत चर्चा की। कृषि सखियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर कृषि नवाचारी किसान हड़मान दास स्वामी व अन्य प्रगतिशील किसान ने भी अपने विचार रखें। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक उद्यान मुकेश गहलोत ने किया।

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