श्री शंखेश्वर तीर्थ में अक्षय पथ का शंखनाद: मुमुक्षु अक्ष कवाड़ जैन दीक्षा महोत्सव का शुभारंभ

AYUSH ANTIMA
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रानीवाड़ा/जालौर (मदन माहेश्वरी): विश्वप्रसिद्ध श्री शंखेश्वर जैन श्वेतांबर तीर्थ में पादरू (राजस्थान) के मुमुक्षु अक्ष कवाड़ जैन के दीक्षा महोत्सव का प्रथम दिन सोमवार को अत्यंत भव्य एवं श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुआ। आचार्य रश्मिरत्नसूरीश्वरजी के सान्निध्य में आयोजित इस महोत्सव ने पूरे तीर्थ क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। 108 पार्श्व भक्ति विहार में आचार्य रश्मिरत्नसूरीश्वरजी, पंन्यास जितरत्न विजय एवं पंन्यास नीतिरत्न विजय सहित साधु-साध्वी भगवंतों का भव्य सामैया (स्वागत) किया गया। इस अवसर पर पादरू, साबरमती सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए कवाड़ परिवार एवं श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे, ढोल-नगाड़ों और रास मंडली के साथ उल्लासपूर्वक शामिल हुए।
तीर्थ के मुख्य प्रवेश द्वार पर मुमुक्षु की माताश्री एवं बहन ने सिर पर चांदी के कलश धारण कर अन्य कलशधारी बहनों के साथ परिक्रमा की। रंगोलियों से सजे मार्ग और भक्तिमय माहौल ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया। श्रद्धालुओं ने शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के दर्शन कर रीषभ भवन में संगीतमय “उपकरण वंदना” कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें आचार्य परंपरा का वंदन किया गया। दोपहर में बहनों द्वारा संयम वस्त्र रंगोत्सव तथा रात्रि में संयम संवेदना एवं मनोरथ माला का आयोजन हुआ। अपने प्रवचन में आचार्य रश्मिरत्नसूरीश्वरजी ने कहा कि “निंदा और निद्रा से दूर रहकर वैराग्य भाव से दीक्षा लेने वाली आत्माएं ही मोक्ष के शाश्वत सुख को प्राप्त करती हैं। संसार एक आभास मात्र है, जबकि अध्यात्म में बाहरी दिखावे से अधिक आंतरिक शुद्धता का महत्व है।” मंगलवार को वर्षीदान वरघोड़ा एवं विशेष भक्ति कार्यक्रम आयोजित होंगे, जबकि रात्रि में विदाई समारोह होगा। बुधवार को मुमुक्षु अक्ष कवाड़ जैन संसार का त्याग कर संयम जीवन को स्वीकार करेंगे। यह महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।

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