झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): शहर के चूणा चौक में आयोजित रामकथा में व्यास पीठ श्री धर्मदास जी महाराज ने सप्तम दिन की कथा में सीता हरण व जटायू मिलन का मार्मिक प्रसंग सुनाया। पंचवटी में मायावी मृग के पीछे भगवान श्रीराम का जाना व लक्ष्मण का भी सीताजी के आगे लक्ष्मण रेखा खींचकर श्रीराम के पीछे पीछे जाना तत्पश्चात् अपनी कुटिल रणनीति के तहत रावण का साधु वेश में आना व सीताजी का लक्ष्मण रेखा लांघते ही रावण का अपने असली रूप में आने के बाद पुष्पक विमान पर बैठाकर लंका की तरफ प्रस्थान किया। जटायू का महाराज श्री बहुत ही भावुक प्रसंग सुनाया। रावण का सीता का हरण करते समय राम के पिता के मित्र गिद्धराज जटायू ने माता सीता को बचाने के लिए रावण से भीषण युद्ध किया। युद्ध में रावण ने जटायू के पंख काट दिए, जिससे वह घायल होकर गिर पड़ा। अंत में जटायू ने भगवान श्रीराम को सीताजी के हिरण की दिशा बताकर उनकी गोद में अपने प्राण त्याग दिए। भगवान श्रीराम ने अपने हाथों से जटायू का अंतिम संस्कार किया। जटायू का यह बलिदान उनकी अटूट भक्ति और धर्म के प्रति प्राण न्योछावर करने की भावना दर्शाता है। कथा में विनोद पुजारी, पवन शर्मा देरवाला, शिवचरण पुरोहित, बालमुकुंद शर्मा, गोपी रामपुरोहित, मोहन पुरोहित, संजय भार्गव, पूर्व पार्षद विनोद सिंघानिया, पवन पंसारी, बाबूलाल सैनी सांखला, सुरेन्द्र शर्मा, वशिष्ठ कुमार शर्मा, योगेश चोमाल, सुरेंद्र भीमसरिया, पवन पुजारी, रामचंद्र पाटोदा, अमित पांडे, सौरभ जोशी, प्रवीण शर्मा, अंकित शर्मा, विवेक बावलिया, लीलाधर पुरोहित व मातृशक्ति उपस्थित थी ।
3/related/default