कोचिंग संस्थानों के मकड जाल में फंसता युवा वर्ग

AYUSH ANTIMA
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हमें भारतीय होने पर गर्व का अहसास होता है। यह महान देश विश्व गुरू बनने को आतुर होने के साथ ही विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है। इन सब बातों के लिए देश का हर नागरिक कटिबद्ध है। इस मिशन में देश के युवा वर्ग की अहम भूमिका होती है। किसी भी देश के लिए उसकी युवा शक्ति विकास को बढ़ाने में सहायक होती है। देश में सामाजिक और भौतिक विविधताएं होने के साथ ही आर्थिक विषमताएं भी बहुत है। इस आर्थिक विषमता से ग्रसित युवा वर्ग ऊंची उड़ान भरने को आतुर नजर आता है। इसी कशमकश भरी जिंदगी के कारण देश का युवा वर्ग कोचिंग संस्थानों के मकड जाल में फंस चुका है। कोचिंग संस्थानों के बड़े बड़े होर्डिंग, जो 100 प्रतिशत सफलता की गारंटी देते नजर आने के साथ ही उन बच्चों की फोटो लगाकर खुद को महिमा मंडित कर रहे हैं, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धि हासिल की है, भले ही उस छात्र का उस संस्थान से दूर का नाता भी न रहा हो। ऐसे विज्ञापनों की चकाचौंध में युवा वर्ग उस होर्डिंग पर खुद की फोटो देखने की लालसा में उनके चंगुल में फंस जाते हैं। उनके सपनो को पूरा करने के लिए उनके अभिभावक भारी भरकम फीस अदा करने के लिए अपना घर व खेत गिरवी रखकर पैसे की व्यवस्था करते हैं। खस्ताहाल औपचारिक शिक्षा अपर्याप्त होती है। ऐसे में यदि कोचिंग संस्थानों का मकड़जाल बढ़ रहा है तो आश्चर्य नही होना चाहिए। इसमें यह भी देखा गया है कि बारहवीं में नामांकन खुद के या किसी अन्य स्कूल मे दिखाकर कोचिंग के लिए बाध्य किया जाता है। भौतिकवाद के इस युग में युवा वर्ग इतना भ्रमित हो गया है कि उसको कोचिंग संस्थानों के ब्रह्म फांस में बंधने के अलावा कोई चारा नजर नहीं आता है। इन संस्थानों की भारी भरकम फीस के कारण अभिभावकों का भी उन पर मानसिक दबाव रहता है। यही कारण है कि बच्चा अवसाद में आने के कारण आत्महत्या तक कर लेता है। राजस्थान के कोटा शहर मे आत्महत्या के बहुत मामले प्रकाश में आये है। यह कोचिंग संस्थान सुरक्षा मानकों को भी पूरा नहीं करते है। कोचिंग संस्थानों के संचालन में सरकार द्वारा सुरक्षा मानकों को दरकिनार किया जाता है। शेखावाटी अंचल में भी इस कोचिंग व्यवस्था ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। झुंझुनूं व सीकर में ऐसे संस्थानों के होर्डिंग्स नजर आ जायेगे। सूत्रों की माने तो केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से IIT-JEE/NEET परिणामों के गलत दावे करने पर राजस्थान के दो कोचिंग संस्थानों पर आर्थिक जुर्माना लगाया। इनमें से एक कोचिंग संस्थान कोटा व दूसरी शेखावाटी अंचल के सीकर शहर में है। ये संस्थान IIT-JEE और NEET में सफल छात्रों का ग़लत श्रेय लेकर युवा वर्ग को भ्रमित कर रहे थे। CCPA ने इन विज्ञापनों को तुरंत हटाने के निर्देश भी दिए हैं। इन कोचिंग संस्थानों के मकड़जाल को सरकार को खत्म करने की दिशा में प्रयास करने चाहिए लेकिन शेखावाटी में यह संस्थान रसूखदारों के है और राजनेताओं की छत्र छाया में फल-फूल रहे हैं। देश की आजादी का हम अमृत काल मना रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य है कि देश में समान शिक्षा नीति व शिक्षा सभी का मौलिक अधिकार नहीं बना पाए। शिक्षा के व्यापारीकरण ने सामाजिक विषमताओं को जन्म दिया है क्योंकि शिक्षा अब धनाढ्य परिवारों की धरोहर हो गई है। सरकार को इस मूलभूत सुविधा को लेकर गंभीरता से सोचना होगा।

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