पांचवां पोकरमल-राजरानी गोयल स्मृति राजस्थानी कथा-साहित्य पुरस्कार-2026: बीकानेर के भंवरलाल 'भ्रमर' और जोधपुर की संतोष चौधरी को किया अर्पित

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर: मुक्ति संस्था द्वारा पांचवां पोकरमल-राजरानी गोयल स्मृति राजस्थानी कथा-साहित्य पुरस्कार 2026 समारोह शनिवार देर शाम को स्टेशन रोड स्थित होटल राजमहल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बीकानेर के वरिष्ठ साहित्यकार भंवरलाल भ्रमर को उनकी कृति 'उपरलो पासो' तथा जोधपुर की रचनाकार संतोष चौधरी को उनके कहानी-संग्रह 'काया री कळझळ' के लिए सम्मान अर्पित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अखिल रंजन गर्ग ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार बुलाकी शर्मा उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि डॉ.नितिन गोयल मंचासीन रहे। 
मुक्ति संस्थान के सचिव कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और बताया कि अब तक नौ कहानीकारों को पुरस्कृत किया जा चुका है, उन्होंने पुरस्कृत किए गए साहित्यकारों के बारे में विस्तार से बताया। जोशी ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पोकरमल राजरानी गोयल राजस्थानी कथा‑साहित्य पुरस्कार का मकसद सिर्फ़ एक पुस्तक या उपन्यास का चयन नहीं, बल्कि पूरे राजस्थानी साहित्य‑समुदाय को जागृत करना है। जब राजस्थानी की कहानी, जो आम तौर पर घरों की चौपड़ों और बीरों की सभाओं तक सीमित रहती थी, मंच‑मंच पर पुरस्कार के रूप में घोषित होती है, तो वह यह संदेश देती है कि यह भाषा अब केवल गाँव की नहीं, बल्कि शहरों, विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय चर्चा की भी भाषा बन सकती है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ.नरेश गोयल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि लगातार पांचवें वर्ष राजस्थानी भाषा और साहित्य के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले साहित्यकारों को पोकरमल और राजरानी गोयल की स्मृति में यह सम्मान अर्पित किए गए हैं। 
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो.अखिल रंजन गर्ग ने कहा कि भाषा और साहित्य किसी भी समाज की आत्मा होते हैं। ऐसे आयोजनों से सांस्कृतिक धरोहर को मजबूती मिलती है। उन्होंने आयोजकों को क्रमिक रूप से ऐसे आयोजनों के लिए साधुवाद दिया। मुख्य अतिथि बुलाकी शर्मा ने राजस्थानी साहित्य की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयोजकों द्वारा सर्वश्रेष्ठ लेखन और लेखक का चयन इस अत्यन्त गरिमामय कार्यक्रम के लिए किया है।
विशिष्ट अतिथि डॉ.नितिन गोयल ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। ऐसे आयोजनों से नई प्रतिभाओं को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम अपनी विशेष पहचान बना चुका है। इससे पहले वरिष्ठ साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने पिछले पांच वर्षों की पुरस्कार परंपरा और निर्णय प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पारदर्शिता और गुणवत्ता इस सम्मान की सबसे बड़ी विशेषता है। इसके लिए निर्णायक मंडल ने हमेशा साहित्यिक मानकों को सर्वोपरि रखा। दोनो कहानीकारों को अतिथियों ने अभिनंदन पत्र, स्मृति चिह्न, श्रीफल, शाॅल, ग्यारह हजार रुपए का चेक भेंटकर सम्मान किया। पुरस्कृत लेखिका संतोष चौधरी ने कहा कि राजस्थानी भाषा में सृजन करना उनके लिए आत्मिक संतोष का विषय है और यह सम्मान उनके लेखन को नई दिशा देगा। संतोष चौधरी के अभिनंदन पत्र का वाचन संजय पुरोहित ने तथा भंवरलाल भ्रमर के अभिनंदन पत्र का वाचन राजाराम स्वर्णकार ने किया। समारोह के आयोजन में सहयोग देने वाले तथा विभिन्न कार्यक्रमों में निर्णायक की भूमिका निभाने के लिए मधु आचार्य ‘आशावादी’, राजाराम स्वर्णकार, डॉ.अजय जोशी, डॉ.रेणुका व्यास, डॉ.हरिशंकर आचार्य, डॉ.गौरी शंकर प्रजापत, डॉ.नमामी शंकर आचार्य, डॉ.उमाकांत गुप्त, डॉ.मदन सैनी एवं जगदीश रतनू को स्मृति चिह्न, शाॅल एवं माला भेंटकर सम्मान किया गया। लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष राजेश गोयल ने आभार व्यक्त करते हुए सभी अतिथियों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन ज्योति प्रकाश रंगा ने किया। समारोह में हिंगलाज दान रतनू,
कमल रंगा, राष्ट्रीय तीरंदाजी कोच अनिल जोशी, डाॅ.फारुख चौहान, अब्दुल शकूर सिसोदिया, वेदप्रकाश अग्रवाल, मोनिका गोड, जयचंद लाल सुखानी, एडवोकेट हीरालाल हर्ष, महेंद्र जैन, सुभाष जोशी, अशफाक कादरी, डाॅ.जिया उल हसन कादरी, डाॅ.बी.एम.खत्री, शिक्षाविद गजेन्द्र सिंह, आशा जोशी, पूजा मोहता, ललित शर्मा सहित शहर के अनेक साहित्यकार, बुद्धिजीवी एवं साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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