RTE प्रवेश प्रक्रिया में लगातार लापरवाही से हजारों बच्चों का भविष्य अधर में — अभिभावकों की बैठक 19 मार्च को: संयुक्त अभिभावक संघ

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की लगातार लापरवाही के कारण हजारों बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। इसी गंभीर विषय पर चर्चा और आगे की रणनीति तय करने के लिए संयुक्त अभिभावक संघ द्वारा गुरुवार, 19 मार्च को प्रातः 11:30 बजे शिक्षा संकुल, जेएलएन मार्ग, जयपुर (जयपुर डेयरी के पास) अभिभावकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि सत्र 2025-26 में भी RTE प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अनेक अनियमितताएं और प्रशासनिक लापरवाहियां सामने आई थीं। प्रदेशभर में लाखों अभिभावकों ने अपने बच्चों के लिए आवेदन किए, लेकिन बड़ी संख्या में पात्र बच्चों को अब तक विद्यालयों में नियमित प्रवेश नहीं मिल पाया। कई निजी स्कूलों द्वारा सीटें खाली होने के बावजूद प्रवेश नहीं देना, दस्तावेजों में अनावश्यक आपत्तियां लगाना तथा अभिभावकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगवाना जैसी शिकायतें सामने आईं, लेकिन शिक्षा विभाग इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं कर पाया। पिछले सत्र में संघ के तत्वाधान में एकजुट हुए अभिभावकों के आंदोलनों का ही परिणाम था कि 16 हजार से अधिक पात्र विद्यार्थियों का दाखिला सड़कों पर उतरने की वजह से हो पाए थे, जिसमें अभी भी 40 हजार बच्चों के दाखिले अभी भी रिक्त ही पड़े हुए है। पिछले सत्र में कुल 80 हजार विद्यार्थियों की लॉटरी शिक्षा मंत्री ने निकाली थी। उन्होंने कहा कि पिछले सत्र में भी RTE की सीटों को लेकर पारदर्शिता का अभाव रहा। कई स्कूलों ने सीटें खाली होने के बावजूद उन्हें पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं किया, वहीं विभागीय मॉनिटरिंग भी काफी कमजोर रही है। परिणामस्वरूप हजारों पात्र बच्चे शिक्षा के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित रह गए। प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए प्रदेशभर से 6 लाख से अधिक अभिभावकों ने RTE के तहत आवेदन किए हैं, लेकिन अभी तक प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता, समयबद्धता और पारदर्शिता का अभाव दिखाई नहीं दे रहा है। यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने समय रहते व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया तो इस बार भी हजारों बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून गरीब और जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से बनाया गया था, किंतु सरकार और प्रशासन की उदासीनता के कारण यह कानून कागजों तक सीमित होता जा रहा है। इसी संदर्भ में RTE के तहत आवेदन करने वाले सभी अभिभावकों की बैठक 19 मार्च को आयोजित की जा रही है, जिसमें पिछले सत्र की समस्याओं, वर्तमान सत्र की स्थिति और सरकार से की जाने वाली मांगों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संयुक्त अभिभावक संघ ने सभी अभिभावकों से अधिक से अधिक संख्या में बैठक में शामिल होकर अपने बच्चों के अधिकारों की लड़ाई में एकजुट होने का आह्वान किया है।

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