माननीय हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट अपने आदेशो में स्पष्ट कर चुके हैं कि राजस्थान में पंचायत व नगर निकाय चुनावो की प्रकिया 15 अप्रैल तक पूरी हो जानी चाहिए। भजन लाल शर्मा सरकार के इन चुनावों के टालने के सारे हथकंडे फैल हो जाने के बाद ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के दामन में छिपकर चुनाव टालने की जुगत में है। हालांकि राज्य चुनाव आयोग ने अपनी पूरी तैयारी कर रखी है। राज्य के ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग ने अभी तक अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौपी है। 15 अप्रेल के आने में अब मात्र 30 दिन ही बचे हैं और इन दिनों में रिपोर्ट आना संभव नहीं लगता है। यदि सरकार बिना इस रिपोर्ट के चुनाव के लिए तैयार हो जाती है तो ओबीसी के आरक्षण वाली जातियां हाईकोर्ट का रूख कर सकती है। विदित हो इन चुनावों को लेकर भजन लाल शर्मा सरकार के मंत्रियों के बयान विरोधाभासी रहे हैं। उन बयानो से यह भी झलकता है कि भाजपा इन चुनावों में जाने से कतरा रही है। सूत्रों की मानें तो राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि तय समय पर चुनाव नहीं हुए तो सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट द्वारा अवमानना की कारवाई की तो इसके लिए पंचायती राज विभाग के अफसर जिम्मेदार होंगे। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न मिलने के कारण ओबीसी वार्ड तय नहीं हो पाए हैं, इसके चलते राज्य चुनाव आयोग चुनावों की घोषणा नहीं कर पा रहा है। राज्य में 14999 ग्राम पंचायतों के चुनाव में 4 करोड़ 2 लाख 20 हजार 734 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आयोग ने अपने पत्र में 15 अप्रेल तक अनिवार्य रूप से चुनाव करवाने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट के शीला कुमारी बनाम राजस्थान सरकार मामले का हवाला देते हुए कहा है कि माननीय हाई कोर्ट द्वारा 15 अप्रेल तक अनिवार्य रूप से चुनाव हो जाने चाहिए। राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव करवाने को लेकर अपनी पूरी तैयारीयां कर ली है। आयोग 25 फरवरी को अपनी फाइनल वोटर लिस्ट भी जारी कर चुका है। अब गेंद सरकार के पाले में है व उसी के निर्णय का इंतजार है।
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