वैसे तो झुन्झुनू जिला आया राम गया राम की राजनीति के लिए विख्यात रहा है। यही कारण है कि जिले में आयातित नेताओं की चमक देखने को मिली। सामान्य कार्यकर्ता यहां तक कि जिले के संगठन के पदाधिकारियों को भी प्रदेश के नेताओं के दर्शन दुर्लभ हो रहे थे। एक विशेष वर्ग के नेताओं ने भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को ऐसे घेर रखा था, जैसे शहद को मधुमक्खी ढके रहती है। मदन राठौड़, मदन दिलावर के साथ सेल्फी लेने की होड़, फिर सोशल मिडिया पर छपास रोग से ग्रसित इन नेताओं के फोटो की भरमार कि संगठनात्मक व गंभीर विषयों पर चर्चा करते हुए। यह नजारा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच व शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के झुंझुनूं एक दिवसीय दौरे का था। छपास रोग से ग्रसित ढाणियो में बंटे इन स्थानीय नेताओं ने नवलगढ़ से ही फोटो सैशन में सम्मिलित होकर अपने चिर परिचित कार्य को अंजाम देना शुरू कर दिया।
इन स्थानीय नेताओं की महत्वकांक्षा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्षद के चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़कर जमानत जब्त करवाने वाले एक नेता ने खुद को स्वयंभू मंडल अध्यक्ष घोषित कर दिया। इस प्रकरण से स्पष्ट जाहिर है कि जिलाध्यक्ष की संगठन पर कोई पकड़ नहीं है और अपनी अपनी डफ़ली अपना अपना राग का आलाप हो रहा है। यही नजारा प्रदेश के नेताओं के झुंझुनूं दौरे मे देखने को मिला। आयोजन के कुछ स्थानों पर तो मंच पर अव्यवस्था देखने को मिली कि प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भाषण कर रहे हैं और स्थानीय नेता मदन दिलावर को दुपट्टा, माला व साफा पहनाने की होड़ में धक्का मुक्की कर रहे हैं। यह आलम उसी छपास रोग से ग्रसित है कि कहीं उनकी फोटो न आए तो सोशल मिडिया पर क्या डालेंगे।
यदि जिले के संगठन नेतृत्व ने इन छपास के रोगी नेताओं से छुटकारा न पाया तो आगामी नगर निकाय चुनावों व पंचायत चुनावों में इसका खामियाजा भाजपा को भुगतना होगा। प्रदेश नेतृत्व को भी इस बात का संज्ञान लेना होगा कि छपास रोग से ग्रसित नेताओं से चुनाव नहीं जीते जाते, धरातल व आमजन से जुड़े रहने वाला नेता ही चुनाव में विजयी होता है और ऐसे नेताओं को दूर ही रखने की कवायद हो रही है, जो जिले में भाजपा संगठन के लिए शुभ संकेत नहीं है।