भाजपा सरकार ने शेखावाटी की हवेलियों के लिए साम्राज्य बदलने की तैयारी कर ली है। झुंझुनूं मे बड़े बड़े चौक, बड़ी बड़ी छत, जाली, झरोखेदार हवेलियों पर अब हथौड़ा नहीं चलेगा। झुंझुनूं में 267, सीकर में 268 व चुरु में 113 हवेलियां चिन्हित की गई है। इन हवेलियों की पहचान कर उनके स्वामित्व के समस्त तथ्य जुटाये जायेंगे। शेखावाटी में जो भी विदेशी या देश के पर्यटक आते हैं, उनकी पहली पसंद हेरिटेज हवेलियां देखना होता है। वास्तुकला व राजस्थानी संस्कृति की झलक इनमें स्पष्ट दिखाई देती है। यह हवेलियां ईंट व गारे से बनी इमारतें ही नहीं है बल्कि कला कौशल, बेजोड़ सांस्कृतिक विरासत व शेखावाटी के समृद्ध इतिहास की धरोहर है लेकिन यह सबसे बड़ी विडंबना है कि उचित रख रखाव न होने से जर्जर अवस्था में है और कुछ तो भूमाफियो की जद में आकर मटियामेट हो गई है। जो भी सरकारें आई, बजट में घोषणाएं कर वाहवाही लूटने का काम किया लेकिन धरातल पर शुन्य ही कार्य दिखाई दिया। भाजपा व कांग्रेस नीत सरकारों ने इन सांस्कृतिक धरोहर की प्रतीक हवेलियों के बेचान पर रोक जरूर लगाई लेकिन यह फाईलों में ही सिमटकर रह गई। भाजपा की भजन लाल शर्मा सरकार की पहल पर इन हवेलियों के संरक्षण को लेकर जयपुर में एक संवाद गोष्ठी का आयोजन किया गया था। जिसमें मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इन अनमोल धरोहरों के जीर्णोद्धार, विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। विदित हो झुन्झुनू जिले की पावन धरा साधु संतों की तपोभूमि भी रही है। इसमें शिवनगरी के नाम से विख्यात बिरला परिवार के वरदाता बावलियां बाबा के नाम से विख्यात परमहंस पंडित गणेशनारायण की तपोभूमि, श्री रतिनाथ महाराज, बाबा शंकर दास जी, संत गुलाब गिरी जी, बाबा गंगाराम जी, बाबा रामेश्वर दास जी, बाबा मस्तराम जी, चंचवनाथ जी, बगड़ स्थित दादू द्वारा, श्रध्दा नाथ जी आदि संतों ने जिले को अपनी तपोभूमि माना। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध राणी सती मंदिर, सालासर धाम, खाटू श्याम जी, लोहार्गल धाम, मां शाकम्बरी माता, जीण माता व नरहड़ के पीरबाबा आदि का समस्त भारतवर्ष से लाखों भक्त इन स्थानों का दर्शन कर खुद को भाग्यशाली समझते हैं। सरकार यदि इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता देकर मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने की दिशा मे इच्छा शक्ति से काम करने की जरूरत है।
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