बीकानेर। दहेज जैसी कुप्रथा को सिर्फ विचारों तक सीमित रखने के बजाय इसे सामाजिक व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। इसी सोच को साकार करते हुए बीदासर बारी, बीकानेर निवासी रामदेव धुंधवाल ने अपने पोते भरत का विवाह बिना दहेज सम्पन्न कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।
दुल्हन की विदाई से पूर्व संपन्न हुई समुठनी की रस्म में उन्होंने परंपरानुसार मात्र एक रुपये और नारियल का लेनदेन कर विवाह की रस्म पूरी की। यह कदम समाज में यह महत्वपूर्ण संदेश देता है कि दहेज प्रथा से मुक्ति तभी संभव है जब परिवार स्वयं आगे आकर बदलाव की पहल करें।
इस उदाहरण से प्रेरणा लेकर समाज में दहेज रहित विवाह को एक व्यापक विचारधारा के रूप में अपनाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इस अभिशाप से पूरी तरह मुक्त हो सकें।