आरक्षण जारी रखने की अशोभनीय शर्त*

AYUSH ANTIMA
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अजाकस के प्रांतीय सम्मेलन में आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा विप्र समाज की बहन बेटियों को लेकर विवादित व अशोभनीय बयान से उनकी विकृत मानसिकता उजागर होती है। विप्र समाज की अस्मिता पर प्रहार करने वाले प्रांतीय अध्यक्ष संतोष वर्मा ने विप्र समाज की बहन बेटियों को लेकर बहुत ही अमर्यादित बयान दिया व जातिगत आरक्षण रखने की एक बहुत ही अशोभनीय शर्त रखी कि जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। आरक्षण को लेकर विप्र समाज की बहन बेटियों को घसीटना एक अक्षम्य अपराध है। ऐसा नहीं है बल्कि संतोष वर्मा का विवादों से पुराना नाता रहा है, सूत्रों की मानें तो पदोन्नति के लिए फर्जी हस्ताक्षर करने के आरोप में जेल जा चुके हैं। वर्ष 2016 में एलआईसी एजेंट महिला ने वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। महिला का आरोप है कि वर्मा ने पालिसी लेने के बहाने करीबी बढ़ाई और उसका शारीरिक शोषण किया, इसको लेकर चालान पेश हो चुका है व प्रकरण माननीय न्यायालय में लंबित है। उक्त प्रकरण से वर्मा की विकृत व सड़ी-गली मानसिकता उजागर होती है कि उनके कैसे संस्कार है और महिलाओं के प्रति उनका क्या नजरिया है। किसी भी समाज की बेटी हो, वह सभी के लिए पूज्य हैं। जो सनातनी समाज बेटियों में देवी के दर्शन करता है, उसी समाज का उच्च अधिकारी बेटियों के प्रति ऐसे निकृष्ट विचार रखे, यह उसके संस्कारों के पतन की पराकाष्ठा ही कहा जायेगा। विदित हो विप्र समाज का इतिहास रहा है कि उसने सदैव अन्य समाजों के पथ प्रदर्शक के रूप में सामाजिक समरसता को बढावा देने का काम किया है। विप्र समाज ने संस्कारों के पोषक होने के साथ ही राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम किया है। एक तरफ सनातन व हिन्दुत्व की रक्षक सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण व महिला सम्मान के मिशन को लेकर आगे बढ़ रही है तो दूसरी तरफ एक उच्च अधिकारी द्वारा उनकी नितियों व मानवीय मूल्यों का खुल्लम खुल्ला उपहास उडा रहे हैं। संतोष वर्मा का यह निम्न स्तरीय बयान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण व सम्मान के मिशन में निश्चित रूप से बाधा है। देखा जाए तो जातिगत आरक्षण की ही परिणति है कि ऐसे निकृष्ट विचार व संस्कारहीन व्यक्ति उच्च पद पर आसीन हैं। अखिल भारतीय ब्राह्मण परिषद (रजि) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के नाते देश व राजस्थान प्रदेश के समस्त विप्र संगठनों के महानुभावों से अपील है कि संतोष वर्मा के उस बयान को लेकर विरोध दर्ज करवाने के साथ ही तुरंत प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर कानून सम्मत कार्यवाही की जाए। इसके साथ ही नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व वाली भाजपा सरकार क्या आरक्षण को जारी रखने की संतोष वर्मा की शर्त से सहमत हैं। अखिल भारतीय ब्राह्मण परिषद (रजि) संतोष वर्मा के इस अशोभनीय बयान की तीव्र शब्दों में भर्त्सना करता है और विप्र समाज की अस्मिता को ललकारने वाले उक्त अधिकारी को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त करने की मांग करने के साथ ही कानूनी कार्रवाई की मांग करता है। वैसे तो इस अक्षम्य अपराध के लिए यह दंड काफी नहीं है।

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